जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने बताया कि जीवन बढ़ाना हमारे हाथ में नहीं, लेकिन जीवन बचाना, बनाना और संवारना हमारे वश में
शिवपुरी। शिवपुरी में चार्तुमास कर रहे प्रसिद्ध जैनाचार्य श्री कुलचंद्र सूरि जी महाराज के शिष्य रत्न बाल मुनि के नाम से विख्यात पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी के सानिध्य में आज आराधना भवन में युवा जाग्रति शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें सेव लाइफ (जीवन बचाओ) विषय पर उन्होंने क्रंातिकारी व्याख्यान दिया। बाल मुनि ने कहा कि जीवन बढ़ाना हमारे हाथ में नहीं है। ईश्वर भी चाहें तो एक पल हमारी जिंदगी का नहीं बढ़ा सकते हैं। लेकिन जीवन बचाना, बनाना और उसे संवारना हमारे हाथ में है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 100 वर्ष की उम्र में भी अधिकांश लोग जो नहीं कर पाते वह मशहूर क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने महज 18 वर्ष की उम्र में देश की आजादी के लिए फांसी पर झूलकर इतिहास बना डाला। शहीद भगतसिंह 23 वर्ष की उम्र में, चंद्रशेखर आजाद 24 वर्ष की उम्र में और स्वामी विवेकानंद ने 39 वर्ष की उम्र में इस संसार को छोड़ दिया। लेकिन इतनी छोटी सी उम्र में उन्होंने न केवल अपना जीवन बचाया बल्कि उसे बनाया और संवारा भी। पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी ने कहा कि जीवन की लंबाई का उतना महत्व नहीं है जितना जीवन की गहराई का है। जीवन को बनाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है, इसे भी अपने डेढ़ घंटे के धारावाहिक प्रवचन में जैन संत ने स्पष्ट किया।
ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले और महज साढ़े 8 वर्ष की उम्र में जैन दीक्षा लेने वाले बाल मुनि कुलदर्शन विजय जी का अपने श्रोताओं से संवाद अद्भूत और मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। उनकी सम्प्रेषण शैली का कोई मुकाबला नहीं है। सेव लाइफ विषय पर उदबोधन देते समय उन्होंने पूरा ध्यान लाइफ शब्द की व्याख्या करने में लगाया।






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