
डंडा बैंक की प्रताड़ना से तंग युवक ने लगाई फांसी
शिवपुरी। शहर में एक बार फिर डंडा बैंक चर्चा में आ गए हैं। शुक्रवार को सुबह डंडा बैंक से प्रताड़ित एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने के एक दिन पहले कुछ निजी फाइनेंस के लोग उस पर रुपये देने का दबाव बना रहे थे। संभवतः इसी कारण से उसने फांसी लगा ली। फिजिकल थाना पुलिस के अनुसार इंद्रा कॉलोनी निवासी 25 वर्षीय राजकुमार कुशवाह पुत्र सुरेश कुशवाह हलवाई का काम करता है। गुरुवार रात वह अपने घर आया और खाना खाने के बाद ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे सोने चला गया। सुबह साढ़े चार बजे नींद खुलने पर जब मृतक के पिता सुरेश ऊपर पहुंचे तो बेटे को फंदे पर लटका देखा। बेटे को इस हाल में देख वे बेसुध हो गए।
परिवार के अन्य सदस्य आए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। अभी इस बात की जांच चल रही है कि आत्महत्या किन कारणों से की। मृतक के दोस्त व रिश्तेदार का कहना है कि कुछ दिन से सूदखोर उसे परेशान कर रहे थे। मृतक के रिश्तेदार नीरज कुशवाह ने बताया कि गुरुवार को राजकुमार के पास कुछ लोगों का फोन आया। वे कर्ज के 5 हजार रुपये मांग रहे थे। इससे राजकुमार काफी परेशान था। उसने कुछ लोगों से ब्याज पर रुपये उठा रखे थे। इस घटना के बाद एक बार फिर सामने आया कि अभी भी शहर में डंडा बैंक का सूदखोरी का कारोबार चरम पर चल रहा है। पिछले दो सालों में दर्जनों लोग डंडा बैंक से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास और आत्महत्या भी कर चुके हैं। कुछ लोग तो अपना सबकुछ बेचकर शहर तक छोड गए हैं।
सालों से चल रहा डंडा बैंक, नहीं लग रही लगाम
डंडा बैंक के फेर में फंसकर कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं। आत्महत्या से लेकर पुरानी शिवपुरी में इसके कारण हत्याकांड भी हो चुका है। पुलिस ने इन पर लगाम कसी थी, लेकिन अब फिर डंडा बैंक ने अपना सिर उठा लिया है। इनमें शहर के कुछ व्यापारियों के साथ नेता पुत्र ासे लेकर सरकारी कर्मचारी तक शामिल हैं। कई लोगों पर मामले भी दर्ज हो चुके हैं। अब तक डंडा बैंक के कारोबार में शहर के पुराने हिस्ट्रीशीटर, दबंग व्यापारी से लेकर छुटभैया नेता शामिल थे। अब कई युवा भी इस काम में जुट गए हैं। उन्होंने 8-10 लडकों का ग्रुप बना लिया है। इनके निशान पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और सट्टा खेलने वाले युवा शामिल होते हैं। यह लोग 20 से 30 प्रतिशत महीने के ब्याज पर रुपये देते हैं। यानी कोई एक लाख का कर्ज लेने जाता है तो पहले ही ब्याज के 20 हजार काटकर 80 हजार दिए जाते हैें और फिर हर महीने 20 हजार ब्याज लेकर पांच महीनों में मूल रकम जितना ब्याज वसूल लिया जाता है। ब्याज में ही कर्ज लेने वाला मूल राशि से कई गुना रकम चुका देता है, लेकिन कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता है।






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