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विद्यालय राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण इकाई : डीआईजी वत्स / Shivpuri News

केंद्रीय विद्यालय में मनाया गया 73 वां गणतंत्र दिवस

शिवपुरी। राष्ट्र के हर नागरिक को जीवन में अपने कर्तव्यबोध का अबलंबन सुनिश्चित करके चलना चाहिए।अधिकारों के साथ हमारा जीवन तभी समावेशी और समुन्नत हो सकता है जब समानन्तर रूप से हम कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहें। नया भारत अपने नागरिकों की जबाबदेही की जमीन पर ही वैशिवक भूमिका हांसिल करेगा।यह बात केंद्रीय विधालय आईटीबीपी शिवपुरी के चेयरमैन श्री आर एस वत्स डीआईजी आईटीबीपी शिवपुरी ने गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही। समारोह में विधालय के प्राचार्य डॉ संजय शर्मा एवं जेजेबी सदस्य डॉ अजय खेमरिया ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

वत्स ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि विद्यालय एक ऐसा स्थान होता है जहां नागरिक निर्माण के बुनियादी तत्व पीढ़ी दर पीढ़ी निर्मित किए जाते है इसलिए एक राष्ट्र के जीवन में विधालयों का बहुत ही निर्णायक महत्व है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय देश भर में अपनी इस भूमिका में सफल रहे हैं इसके बाबजूद हमें सातत्य के साथ इस चुनौती को हमेशा उत्साह और निष्ठा के साथ धारण करके चलना चाहिए।श्री वत्स ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना विद्यालयों के रास्ते ही साकार होगा इस बात को सभी शिक्षकों को समझना होगा। उन्होंने भारतीय संविधान को दुनियां का सर्वश्रेष्ठ संविधान बताते हुए कहा कि यह केवल भारत ही नही बल्कि मानव के कल्याण की महान उद्घोषणा भी है।

विधालय के प्राचार्य डॉ संजय शर्मा ने कहा कि हमारा संविधान एक बेजोड़ कृति है जो सर्वश्रेष्ठ शासन पद्वतियों का निचोड़ है।इसे डॉ बी आर अंबेडकर समेत अन्य महान विधिवेत्ताओं एवं सेनानियों ने मिलकर बनाया है।डॉ शर्मा ने कहा कि भारत के संविधान के प्रति आम आदमी में सजग भाव की आवश्यकता है क्योंकि मौजूदा परिवेश में समाज में उन राष्ट्रीय तत्वों की आवश्यकता अधिक है जिन भावों के साथ हमारे महान पुरखों ने इसकी रचना की थी।जेजेबी सदस्य डॉ अजय खेमरिया ने कहा कि मूल संविधान भारत की महान संस्कृति एवं स्वत्व से एकीकृत है इसी उद्देश्य से जो 22 चित्र इसकी मूल प्रति में जोड़े गए वे भारत के स्वत्व को आने वाले भविष्य के साथ संयुक्त करते थे।डॉ खेमरिया ने बताया कि मूलाधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के आरम्भ में राम दरबार और कुरूक्षेत्र में गीता का ज्ञान देते श्री कृष्ण के चित्र इसलिए जोड़े गए है ताकि भारत में लोग राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भी धारण करें।

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