शिवपुरी। खबर शिवपुरी जिले के फतेहपुर क्षेत्र से आ रही है। यहां एक पटवारी को लोकायुक्त पुलिस ने 35 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी ने भवन नामांतरण के नाम पर 40 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बिना रिश्वत के नामांतरण करने की मना कर दी। जिस पर फरियादी ने लोकायुक्त में शिकायत की जहां पुलिस ने पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार फरियादी राजेंद्र जैन निवासी पुरानी शिवपुरी ने बताया कि उसका एक मकान गुरूद्वारे के पास िस्थत है। उस मकान का नामांतरण करवाना था जिस पर पटवारी अभिनव चतुर्वेदी के पास गया और वह राेज बहाने बनाकर उसे लौटा देता। इसके बाद पटवारी ने 40 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। जिस पर कुछ कम करने को लेकर मामला 35 हजार रुपए तक सेटल हो गया।
मामले को लेकर राजेंद्र ने ग्वालियर में लोकायुक्त पुलिस को शिकायत की जहां मंगलवार को जब राजेंद्र रिश्वत के 35 हजार रुपए देने घर गया और पटवारी को 2 हजार के 17 नोट, 500 के 2 नोट दिए। रुपए लेने के बाद पटवारी उनको गिनने लगा। इतने में राजेंद्र ने लोकायुक्त पुलिस को इशारा कर दिया। जिस पर घर के बार खड़ी हुई लोकायुक्त पुलिस अंदर आ गई और पटवारी को रिश्वत के रुपयों के साथ गिरफ्तार कर लिया। यह थी लोकायुक्त की टीम रिश्वतखोर पटवारी पर इस छापामार कार्रवाई में डीएसपी प्रद्युम्न पाराशर,टीआई आराधना डेविस,टीआई कविन्द्र सिंह चौहान आरक्षक देवेन्द्र पवैया,आरक्षक बलवीर सिंह,आरक्षक धीरज नायक सहित इंद्रभान सिंह आरक्षक शामिल थे।बताया जा रहा है कि यह अकेला एक पटवारी का मामला नहीं है। जिले में पदस्थ अधिकतर ऐसे पटवारी है जो नामांतरण या अन्य काम के लिए मोटी रकम की वसूली करते हैं। यह वसूली गई रकम केवल पटवारी तक नहीं बल्कि सभी नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों तक जाती हैं। बिना रुपए लेनदेन के तहसील के अंदर कोई काम नहीं होता है और इमानदारी तो यहां से बिलकुल ही गायब हो गई है और सारा खेल रिश्वत के रुप में चल रहा है लेकिन फिर भी कोई कहने और सुनने वाला नहीं है।






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