शिवपुरी। प्रकरणों के निपटारे के लिए बीते रोज नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान अलग-अलग विभागों के काउंटर शिकायतों के निराकरण के लिए लगे हुए थे। वहीं बिजली विभाग का काउंटर भी लगा हुआ था यहां किसी प्रकरण को लेकर बिजली कंपनी के कर्मचारियों व एडवोकेट में बहस हो गई। बहस के बाद एडवोकेट वहां से चले गए लेकिन बिजली विभाग से नाखुश लोगों ने एई भदौरिया की लात-घूसों से मारपीट कर दी। मारपीट के विरोध में बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने पूरे जिले में हड़ताल कर दी। इस हड़ताल को अवैध बताते हुए भूतपूर्व अध्यक्ष जिला अभिभाषक संघ एडवोकेट विजय तिवारी ऊर्जा विभाग के सचिव को पत्र लिखा है।
इस पत्र में बताया कि एई रणजीतसिंह भदौरिया का आमजन के प्रति व्यवहार सही नहीं है इसलिए मौजूद भीड़ में से कुछ व्यक्तियों ने भदौरिया की मारपीट कर दी। मामले को लेकर भदौरिया ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत 11 दिसंबर को दर्ज करा दी थी। लेकिन घटना के अगले दिन यानि कि 12 दिसंबर को रणजीत भदौरिया न्यायालय शिवपुरी में कार्यरत कुछ अधिवक्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया और िबिजली विभाग के अधिकारियों के साथ एसपी को ज्ञापन सौंपा। 4 दिसंबर को एडवोकेट मोहित ठाकुर व देवेंद्र ओझा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद भी बिजली कंपनी के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा अवैधानिक मांगों को लेकर हड़ताल कर जन सामान्य को असुविधा उत्पन्न् की जा रही है जिसका बिजली कंपनी के कर्मचारियों को कोई अधिकार नहीं है। यहां बताना होगा कि बिजली कंपनी द्वारा जनता से अवैध वसूली की जाती है विरोध करने पर जनता पर झूठे केस दर्ज करवा दिए जाते हैं जिस कारण कंपनी के विरूद्ध लोगों में आकोश है और यही आक्रोश नेशनल लोक अदालत के दौरान सामाने आया। घटना को लेकर अभिभाषक संघ ने निंदा की और पुलिस का पूर्ण सहयेाग किया, लेकिन इसके बाद भी बिजली कर्मचारियों द्वारा हड़ताल किया जाना न्याय व्यवसथा के प्रतिकूल नहीं है। कर्मचारियों की मांग है कि वकीलों को जेल भेजा जाए जबकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ही गिरफ्तार वकीलों को पुलिस ने रिहा कर दिया है। इसलिए बिजली कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल को अवैध ठहराया जाए और उन पर कठोर कार्रवाई की जाए।






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