शिवपुरी। कोरोना महामारी के कारण करीब दो साल तक बंद रहने के बाद अब जब स्कूल खुल चुके हैं तब भी शिक्षक गंभीरता नहीं बरत रहे हैं। ग्रामीण अंचल में स्कूल की इमारतें बनी हुई हैं, उनमें स्टाफ भी है और बच्चों ने दाखिला भी ले रहा है। लेकिन यह सब कुछ कागजी ही है क्योंकि हकीकत में स्कूलों में ताला लगा रहता है और शिक्षक अपना दायित्व छोड़ घर पर आराम करते हैं।
शिवपुरी बीआरसीसी अंगद सिंह तोमर जब स्कूलों के निरीक्षण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय पहुंचे तो उन्हें स्कूल टाइम में स्कूल बंद मिले। खुटेला माध्यमिक विद्यालय में स्कूल पर ताला लगा हुआ था और तीनों शिक्षक नदारत थे। मोहम्मदपुर विद्यालय में तो स्थिति ही अलग थी। यहां स्कूल परिसर में तो ताला डला हुआ था, लेकिन शिक्षक तारीक खान वहीं स्कूल के बाहर खड़े हुए मिल गए। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि उक्त विद्यालयों का यही हाल है। कभी स्कूल खुलते नहीं है और कभी खुल भी जाते हैं तो शिक्षक डेढ़ बजे ताला लगाकर भाग जाते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे है। बीआरसीसी अंगद सिंह तोमर को भोपाल से ऑनलाइन खुटेला माध्यमिक शाला का निरीक्षण करने का निर्देश मिला था। उसी निर्देश के क्रम में जब वह जनशिक्षक दीवान शर्मा और वेदप्रकाश शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। तो स्कूल खुटेला बंद मिला।
ग्रामीणों ने शिक्षकों के खिलाफ दिया पंचनामा
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने पंचनामा प्रस्तुत किया कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाते नहीं है और लगभग रोजाना डेढ़ बजे शाला बंद करके चले जाते हैं। शाला में पदस्थ शिक्षक संतम सिंह, मोहर सिंह और संतोष कोरकू अपने दायत्व का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद बीआरसीसी ने उनकी वेतन वृद्धि रोकने का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्तुत किया है






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