वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की टीम ने दिया प्रशिक्षण, आज से 45 कैमरे लगाकर शुरू करेंगे रिकॉर्डिंग
शिवपुरी। माधव नेशनल पार्क में टाइगर की दहाड़ जल्द सुनाई दे इसके लिए लगातार तेज प्रयास किए जा रहे हैं। निरंतर सभी संबंधित एजेंसियों के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। साथ ही नेशनल पार्क प्रबंधन उन सभ इंतजामों को पूरा करने में जुटा हुआ है जो टाइगर के लिए जरूरी हैं। टाइगर के आने के पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाइगर के लिए पर्याप्त भोजन पार्क में उपलब्ध होगा या नहीं। यह तय हो चुका है कि एक टाइगर नहीं बल्कि दो जोड़े या इससे अधिक टाइगर शिवपुरी को मिलेंगे। टाइगर पिंजरे में नहीं, बल्कि वहां प्राकृतिक वातावरण में रहेगा। ऐसे में उसके लिए पर्याप्त शाकाहारी जानवरों की उपलब्धता जरूरी है जिससे वह आसानी से शिकार कर सके और आराम से रह सके। इसके लिए नेशनल पार्क में शुक्रवार से कैमरा ट्रैपिंग की जा रही है। कैमरा ट्रैपिंग 21 दिन तक चलेगी जिसमें 45 कैमरा पार्क में अलग-अलग जोन में लगाए जाएंगे। इन कैमरों में 21 दिन तक रिकॉर्डिंग करने के बाद एनालिसिस की जाएगी कि साल 2018 की गणना के बाद से यहां कितने जानवर बढ़े हैं। साथ ही टीम यह भी देखेगी कि इतने जानवरों की संख्या टाइगर के लिए पर्याप्त होगी या नहीं। इसके लिए गुरुवार को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की टीम ने नेशनल पार्क प्रबंधन अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से वैज्ञानिक डॉ. तनुज और डॉ. ऋषि शिवपुरी में आए हैं। एनटीसीएम के साथ 18 नवंबर को सीसीएफ सीएस निनामा की महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में होना थी, लेकिन दिल्ली में बने प्रदूषण के हालात के कारण रद्द हो गई थी। अब यह बैठक इसी माह ऑनलाइन करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें एनटीसीए टाइगर के लिए जरूरतें बताएगा जिसे पूरा करने के संबंध में नेशनल पार्क काम शुरू कर देगा।
इनका कहना है
45 कैमरे लगाकर 21 दिन रिकॉर्डिंग कर देखेंगे कि वन्यप्राणियों की संख्या में कितना इजाफा हुआ है। इसके लिए प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। टाइगर लाने के संबंध में सभी काम तेजी से किए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही टाइगर का पुर्नवास किया जा सकेगा।
– अनिल सोनी, उपसंचालक, माधव राष्ट्रीय उद्यान






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