किराड़ धाकड़, क्षत्रिय समाज बैराड़ का ऐतिहासिक फैसला

बैराड़। किराड़ हितकारिणी सभा बैराड़ के लगातार प्रयासों की बदौलत किराड़ धाकड़ समाज में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही मृत्युभोज नामक कुरुति को मिटा दिया गया। मीडिया प्रभारी माखन सिंह धाकड़ ने जानकारी देते हुए बताया है कि ग्राम जौराई मेंं स्वर्गीय श्रीमती कस्तूरी बाई पत्नी शंकर लाल धाकड़ के निधन के बाद किराड़ हितकारिणी सभा बैराड़ के पदाधिकारीगण उनके निवास पर पहुंचे उनके पुत्रगण सुरेश, अपरवल, नेपाल,बल्लभ को समझाया,समिति के निवेदन को स्वीकारते हुए समाज के विकाश के लिए उनहोंने मृत्युभोज को बंद ,केवल कन्याभोज, ब्रह्मभोज, भाई बंद नाते रिस्तेदार बगैर चि_ी, करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इसी क्रम में दो दिन बाद ग्राम गाजीगढ़ में स्वर्गीय श्रीमती सावित्री देवी पत्नी बालू राम धाकड़ का निधन हो गया हितकारिणी सभा के निवेदन को उनके पुत्रगणों प्रेम, महेश, दिनेश, पुरुषोत्तम, गणेश ने स्वीकारते हुए मृत्युभोज को बंद(सीमित जौराई ग्राम की तरह)करने का साहसिक और ऐतिहासिक फैसला लिया इसके बाद दो दिन बाद ग्राम जौराई मेंं स्वर्गीय श्रीमती तेजो बाई पत्नी स्वर्गीय मरूआ राम धाकड़ का स्वर्गवास हो गया उनके पुत्र उम्मेद धाकड़ ने भी ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मृत्युभोज को बंद (सीमित) करने का निर्णय लिया। ये तीनों परिवारों को किराड़ हितकारिणी सभा बैराड़ धन्यबाद ज्ञापित करते हुए उनकी भूरी भूरी प्रशंसा करती है और उनके इस समाज सुधार हेतु किये गए त्याग को हमेशा याद रखेगी।






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