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बैक्टीरिया से विकृत हुआ चेहरा एक हफ्ते में दिखने लगा इतना सुंदर

tania 11 08 2017

दंतेवाड़ा । 10 दिन पहले जब बड़े हड़मामुंडा गांव की
तानिया को उसके परिजन लेकर आए तब बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से उसका चेहरा
काफी विकृत हो गया था। उपचार में देरी होती तो सेप्टिक शॉक अर्थात मवाद
फैल जाने की आशंका थी और इससे तानिया को गंभीर समस्या हो सकती थी।
जिला
अस्पताल में इसका ट्रीटमेंट बड़ी सावधानी से आरंभ किया गया। हर दिन इसके
अभिभावकों ने अपने बच्चे में चमत्कार होते देखा और दस दिन बाद जब तानिया
डिस्चार्ज हुई तो उसका मासूम सा चेहरा उसे फिर मिल गया था।
ऐसी ही
कहानी पीहू की भी है। सुरनार की पीहू जब जिला अस्पताल आई तो केवल दो महीने
की थी और गंभीर रूप से कुपोषित थी। एनीमिया के साथ ही भयंकर कुपोषण की वजह
से इसे कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं। पीहू चूँकि दो महीने की थी इसलिए दो
दिन तक इलाज के बाद डॉ राजेश ध्रुव ने सिविल सर्जन डॉ शांडिल्य से उसे पोषण
पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती करने की सलाह दी।
यद्यपि एनआरसी
में छह महीने से ऊपर के बच्चों को ही रखा जाता है फिर भी बेहद कुपोषित
होने की वजह से डॉ शांडिल्य ने एनआरसी में रखने की इजाजत दी। डॉ ध्रुव ने
बताया कि जिला अस्पताल में सबसे पहले बच्चे को खून चढ़ाया गया।
सबसे
मुश्किल यह थी कि बच्चे की नस कहां से ढूंढी जाए। फिर पोषण पुनर्वास केंद्र
में डाइट चार्ट के अनुसार काम किया गया। चूंकि बच्चा बहुत छोटा था इसलिए
अपनी माँ के दूध पर निर्भर था। यहां समस्या पकड़ में आई कि मां बच्चे को सही
तरह से दूध नहीं पिला पा रही है और मां को लग रहा है कि बच्चा दूध पी रहा
है।
फीडिंग डिमांस्ट्रेटर चंद्र किरण ने इस संबंध में मेहनत की।
बच्ची की स्थिति में जब थोडा सुधार आया तो अभिभावक इसे ले जाने की बात कहने
लगे लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मनाया कि अभी बच्ची कुपोषण के दायरे से पूरी
तरह से बाहर नहीं आई है।
अभिभावकों ने बात मान ली और धीरे-धीरे
बच्ची में पूरा सुधार आ गया। बच्ची ने वेट भी गेन कर लिया है और दूध भी ठीक
से पी रही है। डॉ राजेश ध्रुव ने बताया कि पीहू को जब देखा तो लगा कि ये
बेहद कठिन चुनौती है फिर हम मेहनत में जुट गए। लगातार पीहू की मानीटरिंग
की, इसका अच्छा नतीजा आया है और हम सब बहुत खुश हैं।

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