के मौके पर आर्म्ड फोर्सेस के लिए वीरता पुरस्कार (गैलेंट्री अवॉर्ड) का
एलान हुआ। सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आर्मी और पैरामिलिट्री
फोर्स के 112 वीर सैनिकों के नामों पर मुहर लगाई। पुरस्कारों में 5 कीर्ति
चक्र, 17 शौर्य चक्र, 85 सेना मेडल (गैलेंट्री), 3 नौसेना मेडल, 2 वायुसेना
मेडल शामिल हैं। वहीं, इस बार कोई अशोक चक्र नहीं दिया गया। सीआरपीएफ के
कमांडेंट चेतन चीता, शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार, आर्मी के दो मेजर समेत 3
सैनिकों को दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार (शांतिकाल में) कीर्ति चक्र से
नवाजा है। इन्हें मिला कीर्ति चक्र…
– शहीद मेजर डेविड मंलुन (नगा रेजिमेंट)
– मेजर प्रीतम सिंह कुंवर (गढ़वाल राइफल्स)
– शहीद हवलदार गिरीश गुरुंग (गोरखा राइफल्स)
– कमांडेंट चेतन चीता (सीआरपीएफ)
– शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार (सीआरपीएफ)
– शहीद हवलदार गिरीश गुरुंग (गोरखा राइफल्स)
– कमांडेंट चेतन चीता (सीआरपीएफ)
– शहीद कमांडेंट प्रमोद कुमार (सीआरपीएफ)
CRPF के दो जांबाजों की वीरता के किस्से…
# जख्मी होने पर भी 16 राउंड फायर किए और एक आतंकी को मार गिराया
–
राजस्थान के कोटा के रहने वाले चेतन की उम्र 45 साल है। वे सीआरपीएफ की 45
बटालियन के कमांडेंट हैं। 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपोरा में एनकाउंटर
के दौरान चेतन घायल होने के बावजूद आतंकियों से लड़ते रहे। गोली लगने के बाद
16 राउंड फायर किए। मुठभेड़ के दौरान लश्कर के कमांडर अबु मुसैब को मार
गिराया। इस मुठभेड़ में तीन जवान भी शहीद हुए थे।
राजस्थान के कोटा के रहने वाले चेतन की उम्र 45 साल है। वे सीआरपीएफ की 45
बटालियन के कमांडेंट हैं। 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपोरा में एनकाउंटर
के दौरान चेतन घायल होने के बावजूद आतंकियों से लड़ते रहे। गोली लगने के बाद
16 राउंड फायर किए। मुठभेड़ के दौरान लश्कर के कमांडर अबु मुसैब को मार
गिराया। इस मुठभेड़ में तीन जवान भी शहीद हुए थे।
– डॉक्टरों के
मुताबिक, आतंकियों से लड़ते हुए चेतन को आठ गोलियां लगी थीं। इनमें से तीन
गोलियों ने उन्हें जख्मी कर दिया था। पांच गोलियां बुलेट प्रूफ जैकेट में
फंस गई थीं। एक गोली दाहिने हाथ, दूसरी बाएं हाथ में लगी और तीसरी जांघ से
होते हुए कूल्हे और रेक्टम को जख्मी कर गई थी।
– उन्हें ग्रेनेड के स्प्लिन्टर भी लगे थे। स्प्लिन्टर से जख्मी होने के
कारण दाईं आंख की रोशनी चली गई। एम्स के ट्रॉमा सेंटर में 51 दिन बिताने के
बाद बाहर निकलते वक्त चेतन कमजोर तो दिख रहे थे, पर उनके इरादे बुलंद थे।
जब उनसे पूछा गया कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं, तो चेतन ने तपाक से कहा-
इट्स रॉकिंग।
मुताबिक, आतंकियों से लड़ते हुए चेतन को आठ गोलियां लगी थीं। इनमें से तीन
गोलियों ने उन्हें जख्मी कर दिया था। पांच गोलियां बुलेट प्रूफ जैकेट में
फंस गई थीं। एक गोली दाहिने हाथ, दूसरी बाएं हाथ में लगी और तीसरी जांघ से
होते हुए कूल्हे और रेक्टम को जख्मी कर गई थी।
– उन्हें ग्रेनेड के स्प्लिन्टर भी लगे थे। स्प्लिन्टर से जख्मी होने के
कारण दाईं आंख की रोशनी चली गई। एम्स के ट्रॉमा सेंटर में 51 दिन बिताने के
बाद बाहर निकलते वक्त चेतन कमजोर तो दिख रहे थे, पर उनके इरादे बुलंद थे।
जब उनसे पूछा गया कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं, तो चेतन ने तपाक से कहा-
इट्स रॉकिंग।
# 15 अगस्त पर तिरंगा फहराकर आतंकियों को मारने निकले थे शहीद प्रमोद कुमार
–
श्रीनगर के नौहट्टा चौक पर पिछले साल 15 अगस्त को आतंकी हमले में CRPF के
कमांडेंट प्रमोद कुमार शहीद हो गए थे। स्वतंत्रता दिवस परेड की सलामी लेने
के बाद ही वह आतंकियों को मारने के लिए निकले थे। कुमार उस घर में घुसे
जहां से आतंकी फायर कर रहे थे। बेहद नजदीक पहुंचने के बाद उन्होंने दो
आतंकियों को मार गिराया। सुबह करीब 11 बजे परिवार के पास फोन आया कि
कमांडेंट को सिर में गोली लगी है और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
श्रीनगर के नौहट्टा चौक पर पिछले साल 15 अगस्त को आतंकी हमले में CRPF के
कमांडेंट प्रमोद कुमार शहीद हो गए थे। स्वतंत्रता दिवस परेड की सलामी लेने
के बाद ही वह आतंकियों को मारने के लिए निकले थे। कुमार उस घर में घुसे
जहां से आतंकी फायर कर रहे थे। बेहद नजदीक पहुंचने के बाद उन्होंने दो
आतंकियों को मार गिराया। सुबह करीब 11 बजे परिवार के पास फोन आया कि
कमांडेंट को सिर में गोली लगी है और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
–
इस दिन कुमार ने सुबह 8.29 बजे तिरंगा फहराया, उसके बाद साथी जवानों को
संबोधित भी किया। उन्होंने कहा था, ”हमारी जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं।
चुनौती आतंकवादी और पत्थरबाज हैं। इनसे डट कर मुकाबला करना है और हम
करेंगे। ये आपकी कड़ी मेहनत से संभव है। इसे पूरी लगन से करना होगा।”
– बता दें कि शहीद कमांडेंट मूलरूप से बिहार के बख्तियारपुर के रहने वाले
थे। उनका जन्म 15 अक्तूबर 1972 को हुआ था। वे जामताड़ा में पले-बढ़े। यहां
उनके पिता रेलवे में थे। परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और सात साल की
एक बेटी है।
इस दिन कुमार ने सुबह 8.29 बजे तिरंगा फहराया, उसके बाद साथी जवानों को
संबोधित भी किया। उन्होंने कहा था, ”हमारी जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं।
चुनौती आतंकवादी और पत्थरबाज हैं। इनसे डट कर मुकाबला करना है और हम
करेंगे। ये आपकी कड़ी मेहनत से संभव है। इसे पूरी लगन से करना होगा।”
– बता दें कि शहीद कमांडेंट मूलरूप से बिहार के बख्तियारपुर के रहने वाले
थे। उनका जन्म 15 अक्तूबर 1972 को हुआ था। वे जामताड़ा में पले-बढ़े। यहां
उनके पिता रेलवे में थे। परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और सात साल की
एक बेटी है।
पत्नी से कहा था- देश के लिए कुछ भी करूंगा
–
प्रमोद कुमार ने घटना से पहले की रात पत्नी नेहा त्रिपाठी से आखिरी बार
बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि देश उनके लिए मां है और वो इसके लिए शहीद
होने से परहेज नहीं करेंगे। देश की सिक्युरिटी के लिए किसी भी हद तक
जाएंगे। देखना एक दिन मुझे शौर्य चक्र मिलेगा।
– इसी रात मोबाइल में बेटी आरना के डांस का वीडियो देखकर काफी खुश हुए थे।
उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि आरना अच्छे से डांस सीख रही है। उसका
ख्याल रखना।
– 12 जुलाई, 2015 को ही उनका कमांडेंट के पद पर प्रमोशन हुआ था और श्रीनगर
से दूसरी जगह ट्रांसफर होने वाला था। प्रमोद ने 1998 में सीआरपीएफ ज्वाइन
की थी। वे 2011 से 2014 तक प्रधानमंत्री की सिक्युरिटी (SPG) में तैनात भी
रहे।
प्रमोद कुमार ने घटना से पहले की रात पत्नी नेहा त्रिपाठी से आखिरी बार
बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि देश उनके लिए मां है और वो इसके लिए शहीद
होने से परहेज नहीं करेंगे। देश की सिक्युरिटी के लिए किसी भी हद तक
जाएंगे। देखना एक दिन मुझे शौर्य चक्र मिलेगा।
– इसी रात मोबाइल में बेटी आरना के डांस का वीडियो देखकर काफी खुश हुए थे।
उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि आरना अच्छे से डांस सीख रही है। उसका
ख्याल रखना।
– 12 जुलाई, 2015 को ही उनका कमांडेंट के पद पर प्रमोशन हुआ था और श्रीनगर
से दूसरी जगह ट्रांसफर होने वाला था। प्रमोद ने 1998 में सीआरपीएफ ज्वाइन
की थी। वे 2011 से 2014 तक प्रधानमंत्री की सिक्युरिटी (SPG) में तैनात भी
रहे।





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