
बदरवास।
तीन बर्षों से मौसम की बेरुखी होने से किसानों की लागातार फसलें नष्ट हो
रही है। इस वर्ष भी ज्यादातर किसानों ने मौसम की बेरुखी के कारण अपनी उड़द
सोयाबीन की फसल पशुओं को चराना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि
यह फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, इसलिये मवेशियों को चरा रहे हैं। अल्प
बर्षा के कारण किसानों की उड़द सोयाबीन की फसल में रोग तथा इल्ली के प्रकोप
से फसल पूरी तरह नष्ट हो गयी है। किसान प्रकृति की बेरुखी से पूरी तरह से
हताश हो गया है। किसानों का कहना है। की हम प्रशासन को भी इस बारे में
अवगत कर चुके हैं लेकिन प्रशासन ने भी न ही कोई सर्वे कराए हैं और न कोई
देखने आया है। किसानों का कहना है यदि फसल का सर्वे नही हुआ तो हमे अपने
बच्चों का भरण पोषण करना भी मुश्किल हो जयेगा। इन गांवों में ज्यादातर फसलो
को चराया जा रहा है अगरा, सलोन, चंदोरिया, झूलना, सुमेला, घुरवार, रिजौदी,
दौलतपुर बिजरोनी सहित सैकड़ो ग्रामो में फसलो को मवेशियों के द्रारा चराया
जा रहा है।
तीन बर्षों से मौसम की बेरुखी होने से किसानों की लागातार फसलें नष्ट हो
रही है। इस वर्ष भी ज्यादातर किसानों ने मौसम की बेरुखी के कारण अपनी उड़द
सोयाबीन की फसल पशुओं को चराना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि
यह फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, इसलिये मवेशियों को चरा रहे हैं। अल्प
बर्षा के कारण किसानों की उड़द सोयाबीन की फसल में रोग तथा इल्ली के प्रकोप
से फसल पूरी तरह नष्ट हो गयी है। किसान प्रकृति की बेरुखी से पूरी तरह से
हताश हो गया है। किसानों का कहना है। की हम प्रशासन को भी इस बारे में
अवगत कर चुके हैं लेकिन प्रशासन ने भी न ही कोई सर्वे कराए हैं और न कोई
देखने आया है। किसानों का कहना है यदि फसल का सर्वे नही हुआ तो हमे अपने
बच्चों का भरण पोषण करना भी मुश्किल हो जयेगा। इन गांवों में ज्यादातर फसलो
को चराया जा रहा है अगरा, सलोन, चंदोरिया, झूलना, सुमेला, घुरवार, रिजौदी,
दौलतपुर बिजरोनी सहित सैकड़ो ग्रामो में फसलो को मवेशियों के द्रारा चराया
जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
पहले किसान अपनी नकलों पर फसल चढ़वाए, उसके बाद क्रॉप कटिंग होने तक किसानों को फसल को सुरक्षित रखना होगा।
प्रेमलता पाल, तहसीलदार बदरवास






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