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ब्लू व्हेल गेम का टास्क पूरा करने आगरा से होशंगाबाद आ गई दो लड़कियां

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होशंगाबाद। आगरा के आर्मी स्कूल में पढ़ने वाली 14
वर्षीय दो छात्राओं को ब्लू व्हेल गेम में घर से भागने का टास्क मिला तो वे
आगरा से पंजाब मेल में बैठ गईं, जब उन्हें गलती का अहसास तो होशंगाबाद में
ट्रेन से उतरकर प्लेटफार्म 2 के वेटिंग हाल में बैठ गईं और परिजनों को फोन
कर जानकारी दी। इन दोनों छात्राओं को जीआरपी ने चाइल्ड केयर के हवाले कर
दिया । बुधवार को छात्राओं को चाइल्ड वेलफेयर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) में पेश
किया गया जहां काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
सीडब्ल्यूसी
के सामने इन छात्राओं ने स्वीकार किया है कि वे ब्लू व्हेल गेम खेल रही
थीं और उन्हें दूसरा टास्क घर छोड़ने का मिला था। इसके बाद वे घर से स्कूल
जाने का कहकर निकलीं और आगरा स्टेशन पर मुंबई की ओर जाने वाली पंजाब मेल
में बैठ गईं। आगरा की रहने वाली ये दोनों नाबालिग आर्मी स्कूल में कक्षा 9
की स्टूडेंट हैं। दोनों आपस में अच्छी सहेलिया हैं और एक के पिता फर्नीचर
व्यवसायी और दूसरी के पिता सेना के रिटायर्ड अफसर हैं। बेटियों को लेने
आगरा से होशंगाबाद आए दोनों के पैरेंट्स पूरे समय मीडिया से बचते रहे।
जीआरपी को मिला था मैसेज
जीआरपी
चौकी प्रभारी एसएन मिश्रा ने बताया मंगलवार शाम आगरा के जीआरपी थाने से
मैसेज आया था कि दो लड़कियां पंजाब मेल में बैठी हैं। प्रभारी ने बताया रात 9
बजे के आसपास ट्रेन होशंगाबाद पहुंची तो उन्होंने टीम के साथ पूरी ट्रेन
को खंगाला, लेकिन मैसेज में बताई हुलिया वाली लड़कियां नहीं मिली।
वेटिंग हाल में बैठी थी
एएसआई
ने बताया दोनों लड़कियां प्लेटफार्म क्रमांक दो के वेटिंग हाल में बैठी थी।
पूछने के बाद उन्होंने आगरा का होना बताया। इसके बाद दोनों छात्राओं को
चौकी लेकर आये। छात्राओं ने जीआरपी को बताया कि फोन पर परिजनों ने
होशंगाबाद में उतरने को कहा था तो उतर गये।
घर छोड़ने का मिला था टास्क
सीडब्ल्यूसी
काउंसलिंग में दोनों छात्राओं ने बताया है कि वे ब्लू व्हेल गेम खेल रही
थीं। इसमें पहला टास्क बल्ब फोड़ने का मिला था। दूसरा टास्क घर छोड़ने का
मिला था। उन्होंने बताया सुबह दोनों छात्राएं अपने-अपने घर से स्कूल जाने
का कहकर निकली थी। इसके बाद आगरा स्टेशन पहुंची। प्लेटफार्म पर मुंबई की ओर
जाने वाली पंजाब मेल खड़ी थी तो उसकी एक बोगी में जाकर बैठ गईं। छात्राओं
ने काउंसलरों को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि वे कहां जा रही थी। बस
इतना भर याद था कि दिया हुआ टास्क पूरा करना है।
छात्राओं को घर छोड़ने का टास्क मिला था
दोनों
छात्राओं को ब्लू व्हेल गेम में दूसरा टास्क घर छोड़ने का मिला तो वे ट्रेन
में जाकर बैठ गई। बाद में उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने अपने
पैरेंट्स को फोन किया। पैरेंट्स के कहने पर दोनों छात्राएं होशंगाबाद में
ट्रेन से उतर गई।
 
अनिल झा, सीडब्ल्यूसी सदस्य

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