खंडवा। नर्मदा विस्थापित मजदूर दिलीप केवट के बेटे शंकर ने अपनी काबिलियत साबित करते हुए सोलर ड्रायर बनाया है। उसका डिजाइन और कृषि के क्षेत्र में मॉडल की उपयोगिता देख भाभा रिसर्च सेंटर ने उसकी मदद की और बेहतर मॉडल तैयार करवाया। अब उसे जनवरी में पुर्तगाल में होने वाली कॉन्फ्रेंस के लिए चुना गया है।शंकर 12वीं कृषि का विद्यार्थी है और कृषि वैज्ञानिक बनकर निमाड़ की खेती को समृद्धशाली बनाना चाहता है। 22 से 24 जनवरी तक पुर्तगाल में होने वाली कॉन्फ्रेंस में रिसर्च मॉडल प्रस्तुत करने वाला शंकर सबसे कम उम्र का शोधकर्ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह चंदा करके पुर्तगाल जाने की तैयारी में जुटा है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर विशेष खबर।एक विजिट के दौरान लेपा के नर्मदा सेंटर पर भाभा रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक पहुंचे। उन्होंने जब शंकर द्वारा बनाया मॉडल देखा तो उसे सहयोग देकर इसे वर्किंग मॉडल के रूप में विकसित किया। भाभा रिसर्च सेंटर ने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर शंकर के साथ दो वैज्ञानिकों की रिसर्च करवाई और कार्यशील सोलर ड्रायर तैयार हो गया। इसके बाद रिसर्च सेंटर ने उसका नाम पुर्तगाल में होने वाली कॉन्फ्रेंस के लिए भेजा और उसका चयन भी हो गया। अब वह पुर्तगाल में निमाड़ और देश का नाम रोशन करेगा।
2 लाख रुपए आएगा खर्च
पुर्तगाल में होने वाली कॉन्फ्रेंस में जाने के लिए शंकर को करीब दो लाख रुपए का खर्च आएगा। नर्मदा संस्था के समन्वयक दिग्विजयसिंह चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के लोग शंकर को आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। संस्था ने भी संकल्प लिया है कि उसे अपना शोधकार्य प्रस्तुत करने के लिए पुर्तगाल भेजेगी। मप्र शिक्षा विभाग का विद्यार्थी होने की वजह से उसे सरकार ने भी सहयोग करना चाहिए।
निमाड़ की खेती को बनाना चाहता है उन्नत
शंकर मंडलेश्वर के शासकीय स्कूल से कृषि विज्ञान में 12वीं कर रहा है। उसका कहना है कि पुर्तगाल में सबसे कम उम्र के शोधकर्ता के रूप में जाने के लिए बहुत उत्साहित हूं। अब मैं ओर कड़ी मेहनत करके कृषि वैज्ञानिक बनना चाहता हूं और निमाड़ की खेती को उन्नत बनाना चाहता हूं। नर्मदा पट्टी के विस्थापितों में आगे बढ़ने का भरपूर जज्बा है, बस जरूरत है कुछ संसाधनों और बेहतर मार्गदर्शन की, जो मुझे नर्मदा संस्था से मिला है।







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