
शिवपुरी। धाकड़ और ब्राहमण मतदाताओं के वर्चस्व वाले पोहरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के धाकड़ उम्मीदवार के मुकाबले कांग्रेस ब्राहमण उम्मीदवार पर लगातार दो बार से दांव लगा रही है, लेकिन दोनों बार उसे पराजय का सामना करना पड़ा। अपने खराब अनुभव के कारण सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस इस बात पर भी सोच विचार कर रही है कि क्यों न इस बार धाकड़ उम्मीदवार को टिकट दिया जाए। मुगावली उपचुनाव में भी कांग्रेस ऐसा ही प्रयोग कर चुकी है जब उसने भाजपा के यादव उम्मीदवार के मुकाबले यादव उम्मीदवार मैदान में उतारकर जीत हासिल करने में सफलता हासिल की थी।
पोहरी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 35 हजार धाकड़ मतदाता और लगभग 25 हजार ब्राहमण मतदाता हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस या भाजपा में से कोई एक पार्टी यदि धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देती है तो दूसरी पार्टी ब्राहमण उम्मीदवार को टिकट देकर जीत का समीकरण बनाती है। इस विधानसभा क्षेत्र में धाकड़ और ब्राहमण उम्मीदवार ही विजयी हुए हैं। 1977 में यहां से जनता पार्टी के दामोदर शर्मा विजयी हुए और 1980 में कांग्रेस के हरिवल्लभ शुक्ला, 85 में कांग्रेस के हिमांशु शर्मा, 89 में भाजपा के जगदीश वर्मा, 93 में कांग्रेस की बैजयन्ती वर्मा, 98 में भाजपा के नरेंद्र बिरथरे, 2003 में समानता दल के हरिवल्लभ शुक्ला, 2008 और 2013 में लगातार भाजपा के प्रहलाद भारती यहां से विजयी हुए हैं। इस क्षेत्र में मुकाबला अधिकतर ब्राहमण और धाकड़ उम्मीदवार के बीच हुआ है। भाजपा के ब्राहमण उम्मीदवार नरेंद्र बिरथरे अंतिम बार 93 में और कांग्रेस के ब्राहमण उम्मीदवार सन 85 में हिमांशु शर्मा विजयी हुए। समानता दल के ब्राहमण उम्मीदवार हरिवल्लभ शुक्ला 2003 में जीते। जहां तक विजयी धाकड़ उम्मीदवार का सवाल है तो कांग्रेस की बैजयन्ती वर्मा अंतिम बार 1998 में विजयी हुई। पिछले दो विधानसभा चुनाव से भाजपा ने धाकड़ उम्मीदवार के रूप में प्रहलाद भारती को टिकट दिया और वह विजयी रहे, लेकिन कांगे्रस ने उनके मुकाबले ब्राहमण उम्मीदवारों को टिकट दिया और दोनों चुनावों में उसे पराजय का सामना करना पड़ा। जहां तक 2018 के विधानसभा चुनाव का सवाल है तो भाजपा के प्रहलाद भारती का टिकट लगभग तय माना जा रहा है। इस सुनिश्चितता के पीछे कारण यह है कि वह लगातार दो बार से जीत रहे हैं तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और यशोधरा राजे सिंधिया के काफी नजदीकी हैं। जातिगत समीकरण से भी उनका पलड़ा भारी है। इस कारण उनका टिकट कटे इसकी संभावना काफी धूमिल है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस उनका टिकट मानकर पिछले दो विधानसभा चुनावों की तरह ब्राहमण उम्मीदवार को टिकट दे? इसमें दिक्कत सिर्फ पिछले अनुभव से है। पिछले दोनों विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ब्राहमण उम्मीदवारों को टिकट दिए, परंतु उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई। इसलिए कांग्रेस इस बार धाकड़ मतों में सेंध लगाने के लिए और भाजपा विधायक तथा सरकार के खिलाफ ऐंटीइन्कमबंशी फैक्टर का फायदा उठाने के लिए धाकड़ उम्मीदवार को टिकट देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कांग्रेस के पास भी हैं धाकड़ उम्मीदवार
भाजपा के पास धाकड़ जाति के इकलौते उम्मीदवार दो बार से चुनाव जीत रहे प्रहलाद भारती हैं जबकि कांग्रेस के पास धाकड़ उम्मीदवार के रूप में तीन-तीन दावेदार हैं। कांग्रेस के युवा चेहरे विनोद धाकड़ पोहरी विधानसभा क्षेत्र के मूलनिवासी हैं और काफी समय से टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं। पोहरी के अवतार गुर्जर उनके लिए लॉबिंग करने में जुटे हुए हैं। किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश राठखेड़ा और जनपद पंचायत पोहरी के अध्यक्ष प्रधुम्न वर्मा भी टिकट की कतार में हैं।




