
शिवपुरी। कल स्वतंत्रता दिवस पर छुट्टी होने के चलते बड़ी संख्या में लोग शिवपुरी और ग्वालियर के सीमा क्षेत्र में स्थित सुल्तानगढ़ फॉल पर पिकनिक मनाने पहुंचे। शाम करीब 4 बजे झरने में अचानक पानी का स्तर बढऩे से 12 लोग 100 फीट ऊंचाई से नीचे गिर गए, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं है, जबकि झरने में चट्टानों पर फंसे तीन दर्जन लोगों को रातभर चले रेस्क्यू के बाद बाहर निकाला जा सका।
अब बात करें, कि इस पूरे घटनाक्रम का असली खलनायक कौन है? तो इस भूमिका में सिर्फ और सिर्फ प्रशासन ही खड़ा नजर दिखाई दे रहा है। सुल्तानगढ़ फॉल पर यह कोई पहला हादसा नहीं है, बल्कि इससे पूर्व भी पर्यटक यहां फंस चुके है अंतर इतना है कि कल हुआ घटनाक्रम ने बड़ा रूप ले लिया जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया। झरने पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के माकूल इंतजाम किए होते तो शायद यह घटना देखने को नहीं मिलती। सुल्तान गढ़ फॉल हाईवे के नजदीक है इस कारण भी यहां पर्यटक अधिक संख्या में जाते हैं। खासबात यह है कि न तो हाईवे पर झरने के खतरे से संबंधित कोई सूचना बोर्ड है और न ही झरने पर कोई सुरक्षा गार्ड। इसके अलावा जंगलों में स्थित ऊंचाई वाले इस झरने पर सुरक्षा के लिए रेलिंग भी नहीं लगी हुई है।
अन्य पर्यटक स्थलों के भी हैं यही हालात
बात केवल सुल्तागढ़ फॉल की नहीं है, बल्कि शिवपुरी जिले में अनेक पिकनिक स्पॉट हैं जिन पर सुरक्षा को इंतजाम नजर नहीं आते। जबकि बरसात के समय में बड़ी संख्या में लोग भ्रमण करने के लिए इन स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना चाहिए ताकि लापरवाही से किसी जान नहीं जाए।
अब देखना है कि इस घटना के बाद से प्रशासन कोई सबक सीखेगा या फिर इसे पूर्व की तरह समय के साथ भूल जाएगा।






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