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बड़ी खबर – CM से भी बड़ी शिवपुरी कलेक्टर….?

शिवपुरी। कहने को तो प्रशासनिक मशीनरी शासन के ही इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन शिवपुरी जिले की कलेक्टर श्रीमती शिल्पा गुप्ता तो प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी बड़ी हैं इस बात का अंजाम इस बात से लगाया जा सकता है कि सीएम ऑफिस से आने वाले आदेश को कलेक्टर इतना हल्के में लेती हैं कि फोन तक रिसीव करना जरूरी नहीं समझती हैं। भाजपा जिला कार्यालय मंत्री देवेन्द्र श्रीवास्तव आज दिल्ली के एक निजी हॉस्पीटल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके इलाज हेतु सीएम द्वारा दो लाख की सहायता राशि स्वीकृत की थी जो शिवपुरी कलेक्टर द्वारा हॉस्पीटल के अकाउंट में ट्रांसफर करनी थी, लेकिन कलेक्टर की असंवेदनशीलता और गैर जिम्मेदाराना रवैया के कारण यह सहायता राशि देवेन्द्र श्रीवास्तव को नहीं मिल सकी। भाजपा की मजबूरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने ही जिला कार्यालय मंत्री का सहायता राशि नहीं दिला सकती तो वह एक आदमी या आम कार्यकर्ता की क्या मदद कर सकती है?

  

देवेन्द्र श्रीवास्तव की तबियत जब ज्यादा नहीं बिगड़ी थी तभी वह खुद कलेक्टर के दफ्तर के कई चक्कर लगा चुके थे, लेकिन उनकी कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी, फोन पर भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कलेक्टर साहिबा को फोन उठाने की फुर्सत कहां? जब देवेन्द्र श्रीवास्तव की तबियत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें दिल्ली में एक निजी हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया। इसके बाद सहायता राशि के लिए उनके सुपुत्र नीरज श्रीवास्तव ने कई कलेक्टर शिवपुरी से राशि ट्रांसफर करने के लिए फोन पर संपर्क साधा, लेकिन कलेक्टर ने फोन रिसीव नहीं किए। स्थिति यह बनी है कि आर्थिक परेशानी के चलते देवेन्द्र श्रीवास्तव के परिवार को उनका इलाज कराने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नीरज ने सीएम को भी ट्यूट के माध्यम से कलेक्टर के फोन रिसीव नहीं करने की जानकारी दी।

विधायक भारती ने स्वीकृत कराई थी राशि

बताया जा रहा है कि जिला कार्यालय मंत्री देवेन्द्र श्रीवास्तव के इलाज के लिए विधायक प्रहलाद भारती द्वारा दो लाख की राशि स्वीकृत कराई थी, लेकिन कलेक्टर की असंवेदनशीलता के कारण उन्हें यह सहायता राशि प्राप्त नहीं हो सकी है।

कलेक्टर मोबाइल नहीं करती रिसीव

यहां बता दें कि शिवपुरी कलेक्टर श्रीमती शिल्पा गुप्ता मोबाइल को कम ही रिसीव करती हैं अधिकतर तो उनके द्वारा फोन उठाए ही नहीं जाते है। अब यहां सोचनीय पहलू यह है कि यदि कोई संवेदनशील मामला या बड़ी घटना हो और  कलेक्टर से संपर्क करना चाहे तो वह भले ही फोन लगाता रहे, लेकिन कलेक्टर साहिबा मोबाइल कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझती।

कहीं कांग्रेस मानसिकता की तो नहीं….?

भाजपा शासनकाल में ही भाजपा के पदाधिकारियों को जिस तरह से कलेक्टर द्वारा नजर अंदाज किया जाता है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं कलेक्टर कांग्रेस मानसिकता की तो नहीं है। सूत्रों की मानें तो भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील रघुवंशी के फोन कॉल भी कलेक्टर रिसीव नहीं करती। सहायता राशि के संबंध में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र शर्मा ने भी कई बार कलेक्टर से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन कॉल भी रिसीव नहीं किया गया। 

आगामी चुनाव में भाजपा को भारी पड़ सकता है कलेक्टर का रवैया

सूत्रों की मानें तो जिस तरह से कलेक्टर का रवैया है और भाजपा शासन काल में जिस तरह से प्रशासन बेलगाम है उसका खामियाजा भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है।

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