
शिवपुरी। नगर पालिका को सिंध जलावर्धन योजना की क्रियान्वयन एजेन्सी दोशियान को टर्मिनेट करने के बाद तगड़ा झटका लगा है। दोशियान ने योजना का काम पूर्ण करने हेतु देना बैंक अहमदाबाद से फायनेंस कराया था और इसके एवज में तीन करोड़ की बैंक गारंटी दी थी। अनुबंध समाप्त करने के बाद नगर पालिका ने देना बैंक से तीन करोड़ रूपए की बैंक गारंटी की मांग की, लेकिन देना बैंक ने बैंक गारंटी की रकम वापस करने के स्थान पर अहमदाबाद के सिविल न्यायालय से स्टे ले लिया है जिसकी अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। नए आए मुख्य नगर पालिका अधिकारी सीपी राय ने स्वीकार किया कि देना बैंक को कोर्ट से स्टे मिल गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि स्टे को बैकेट कराने के लिए नगर पालिका 28 अगस्त को न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत करेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंध जलावर्धन योजना का कार्य दोशियान वर्ष 2009 से कर रही है। अनुबंध के तहत दोशियान को दो साल में घर-घर तक सिंध नदी का पानी पहुंचाना था, लेकिन 9 साल बाद भी यह योजना पूर्ण नहीं हुई। शहर में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन नहीं डाली गई और वायपास तक पानी आया अवश्य, लेकिन योजना का कार्य इतना गुणवत्ताहीन तरीके से किया गया कि रोजाना पाइप लाइन में लीकेज होते रहे जिससे पाइप लाइन बदलना आवश्यक हो गया और नगर पालिका ने नई पाइप लाइन डालने के लिए 12 करोड़ रूपए का टेंडर अलग से लगा दिया। इसके साथ ही योजना में विलंब और गुणवत्तापूर्ण तरीके से काम न होने के कारण नगर पालिका ने दोशियान का अनुबंध समाप्त कर दिया और इसके बाद नगर पालिका अधिकारी दोशियान की तीन करोड़ की बैंक गारंटी लेने अहमदाबाद गए। जहां बैंक अधिकारियों ने पहले उन्हें आश्वस्त किया कि सात दिन के भीतर उन्हें बैंक गारंटी की रकम दे दी जाएगी, लेकिन इसके बाद देना बैंक ने न्यायालय पहुंचकर बैंक गारंटी न देने के विरूद्ध स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया।
नगर पालिका में पहुंची स्टे की कॉपी
देना बैंक ने न्यायालय से स्टे लेने के बाद स्टे की कॉपी नगर पालिका कार्यालय को भेज दी है। सीएमओ राय ने इसकी पुष्टि की है। दोशियान को बर्खास्त किए जाने का नोटिस देेने के बाद नगर पालिका ने इस प्रोजेक्ट में लगी बैंक गारंटी की राशि को राजसात करने के प्रयास शुरू किए और नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह तथा पूर्व प्रभारी सीएमओ जीपी भार्गव अहमदाबाद पहुंचे, लेकिन दोशियान ने उनसे बैंक गारंटी वापस करने के लिए सात दिन का समय मांगा। प्रोजेक्ट में देना बैंक थर्ड पार्टनर थी और बैंक गारंटी के विरुद्ध ही उसने दोशियान को रकम फायनेंस की थी। दोशियान कंपनी ने देना बैंक से प्रोजेक्ट के लिए जो राशि फायनेंस कराई उसके एग्रीमेंट में शर्त थी कि नपा द्वारा दोशियान को सीधे भुगतान न करते हुए बैंक के माध्यम से किया जाएगा ताकि बैंक उसके द्वारा फायनेंस की गई रकम का ब्याज वसूल कर सके। प्रारंभ में नगर पालिका ने बैंक के माध्यम से दोशियान को भुगतान किया, लेकिन जब दोशियान का दवाब बढ़ा तो नगर पालिका ने बैंक के माध्यम से भुगतान न करते हुए सीधे पेटी कॉन्ट्रेक्टर को भुगतान किया।
इनका कहना है
नगर पालिका ने हमें बर्खास्त करने का नोटिस जरूर दिया है, लेकिन हम हर दिन पानी की सप्लाई शहर में कर रहे हैं। नगर पालिका द्वारा भुगतान न किए जाने के कारण हमारे कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिला है। जहां तक देना बैंक को स्टे मिलने का सवाल है तो बैंक के पास स्टे लेने के लिए पर्याप्त ग्राउण्ड है।
महेश मिश्रा महाप्रबंधक दोशियान
देना बैंक ने व्यवहार न्यायालय से स्टे लिया है जिसकी अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। देना बैंक रकम देने से बचने के लिए हाथ पैर मार रही है, लेकिन हमने भी जवाब तैयार कर लिया है जिसे 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान न्यायालय में पेश किया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में कोई रूकावट न आए।
सीपी राय मुख्य नगर पालिका अधिकारी शिवपुरी






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