
सहरिया क्रांति के कार्यालय पर जांबाज आदिवासियों का हुआ सम्मान
शिवपुरी –सहरिया क्रांति से जुड़कर व्यसन मुक्त हुआ आदिवासी समाज अब स्वयं का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के साथ साथ दूसरों को भी जीवनदान देने के लिए सदैव तत्पर रहता है। ऐसा ही उदाहरण सहरिया क्रांति के सदस्यों ने गत दिवस 15 अगस्त को पर्यटक स्थल सुल्तानगढ़ में पानी के बहाव में फंसे 45 सदस्यों को बचाकर दिया। सुल्तानगढ़ में फंसे इन पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने में जिन 5 युवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही उनमें सहरिया क्रांति के दो जांबाज सदस्य रामदास आदिवासी और भागीरथ आदिवासी भी थे। रामदास और भागीरथ लम्बे समय से सहरिया क्रांति एक सामाजिक आंदोलन से जुड़े हैं तथा व्यसन मुक्ति की दिशा में कार्य रहे हैं।
आज सहरिया क्रांति कार्यालय पहुंचे इन जांबाज आदिवासियों को सम्मान सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन द्वारा किया गया तथा इनकी बहादुरी की प्रशंसा की। इस अवसर पर दूर दराज से आए सैंकड़ों आदिवासी भाई भी मौजूद थे। पानी के सैलाव में फंसी 45 जिंदगियों को सकुशल बचाने वाले रामदास आदिवासी और भागीरथ आदिवासी का कहना है कि जब से हम सहरिया क्रांति से जुड़े हैं तब से हमने पीडि़त मानवता की सेवा का संकल्प लिया है। इसी संकल्प के क्रम में 15 अगस्त को जब हम सुल्तानगढ़ पहुंचे तो वहाँ कई लोग पानी के बहाव में फंसे हुए थे। रामदास आदिवासी और भागीरथ आदिवासी का कहना है कि हमने इन लोगों को मदद की गुहार करते देखा तो हमसे रहा नहीं गया और इस पानी के बहाव के बीच से सावधानीपूर्वक इन लोगों के समीप जा पहुंचे और सभी एक एक कर सकुशल बाहर निकाल लाए। इन दोनों आदिवासियों का कहना था कि हमारे भीतर यह परिवर्तन सहरिया क्रांति से जुडऩे के बाद ही आया है, अब हमारी सुनवाई अब थानों और प्रशासनिक कार्यालयों में होने लगी है।






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