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मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना : काशी-गया यात्रा में स्टाफ की यात्रियों ने की मारपीट, लगाया वसूली का आरोप

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना किस तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। इसकी नजीर 16 अगस्त को काशी-गया यात्रा के दौरान देखने को मिली। बताया जाता है कि इस यात्रा में गए एक हजार लोगों में से कम से कम 400 अपात्र थे। जिनके पास या तो टिकट नहीं था या वह दूसरे के टिकट पर यात्रा कर रहे थे। यात्रा में शामिल लोगों में अधिकंाश युवा थे। 16 अगस्त को जब यह टे्रन शिवपुरी से रवाना हुई और सतना के बाद जैसे ही उत्तरप्रदेश के किसी स्टेशन पर रूकी। उसी दौरान आईआरसीटीसी के कर्मचारियों ने अपात्र लोगों को ट्रेन से उतारने का फरमान सुना दिया। बस फिर क्या था। विवाद इतना बड़ा कि यात्रियों ने आईआरसीटीसी के मैनेजर की जमकर धुनाई लगा दी और कहा कि उतारना था तो पहले ही उतार देते अब हम यहां से कैसे जाएंगे और यात्रियों ने पटरी के आगे लेटकर आत्महत्या की धमकी दी। जिससे भयभीत होकर यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए ले जाया गया। लेकिन यात्रा में शामिल एक युवा ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि थर्ड क्लास होटल में यात्रियों को ठहराया गया। एक छोटे से कमरें में एक-एक दर्जन यात्रियों को ठहरने की व्यवस्था की गई। भोजन के समय में भी कटौती कर दी गई और 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाला लंच महज 12 बजे खत्म कर दिया गया। आज शिवपुरी उतरे यात्रियों ने अपनी व्यथा का बखान किया। 
स्टेशन पर उतरे कुछ यात्रियों ने जानकारी देते हुए बताया कि शिवपुरी, गुना, ग्वालियर और एक अन्य जिले के लगभग एक हजार बुजुर्ग यात्रियों को काशी गया यात्रा के लिए ले जाया गया। इस ट्रेन में 300 यात्री शिवपुरी के थे। जिनमें से कम से कम 40 प्रतिशत अपात्र थे। जिनके पास या तो टिकट नहीं था या वह दूसरे के टिकट पर यात्रा कर रहे थे। एक युवा यात्री ने तो यहां तक खुलासा किया कि उसके साथ कुल 6 यात्री हैं और जो एक-एक हजार रूपए देकर यात्रा कर रहे हैं। 16 अगस्त को यह ट्रेन शिवपुरी से रवाना हुई और सतना के बाद जैसे ही ट्रेन उत्तरप्रदेश के एक स्टेशन पर रूकी उसी समय आईआरसीटीसी के मैनेजर ने फरमान सुनाया कि गाड़ी में जिनके पास टिकट हो वहीं बैठे तथा ऐसे यात्री ट्रेन से उतर जाएं जिनके पास या तो टिकट नहीं है अथवा वह दूसरे के नाम से यात्रा कर रहे हैं। इस पर बताया जाता है कि पिपरसमा के एक युवक ने प्रतिरोध किया और कहा कि वह तो एक हजार रूपए प्रति टिकट देकर अपने परिवार के 6 सदस्यों के साथ यात्रा कर रहा है। उक्त युवक ने नगर पालिका के एक कर्मचारी का नाम भी लिया। जिसकी वीडियो रिकॉडिंग भी है। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि 400 से अधिक तीर्थ यात्री बोगस थे और आईआरसीटीसी के मैनेजर ने चिल्लाकर कहा कि कलेक्टर और महाराज साहब का आदेश है कि अपात्र लोगों को उतार दिया जाए। बताया जाता है कि यात्रियों में से एक ने प्रदेश सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री को फोन भी लगा दिया और उन्हें बताया कि किस तरह से बेईज्जत कर उन्हें उतारा जा रहा है। यदि उन्हें उतारना था तो शिवपुरी सहित आसपास के जिलों में उतार देते। इस पर बताया जाता है कि उक्त मैनेजर ने कहा कि मैं किसी मंत्री से बात नहीं करता और अपात्र लोग ट्रेन में नहीं बैठेंगे। विवाद इतना बड़ा कि तीर्थ यात्रियों ने यहां तक कह दिया कि वह रेल की पटरी पर लेटकर अपनी जान दे देंगे। लेकिन गाड़ी से नहीं उतरेंगे। ज्यादा विवाद बढ़ने पर कुछ यात्रियों ने स्टाफ की धुनाई लगा दी। डरे सहमे स्टाफ ने फिर यात्रियों को यात्रा कराने में ही अपनी भलाई महसूस हुई। 
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