
दिशा बदले तो दशा बदले (विवेक व्यास), सीवीसी द्वारा भ्रष्ट तंत्र, रिश्वतखोरी, अनियंत्रित होते आधिकारिक तंत्र को नियंत्रित करने की पहल जो अब की है उसे यदि काफी वर्षो पहले अनुशरण में ला दी होती तो आज भारत का नाम अंतरास्ट्रीय स्तर के घूसखोर देशों में बाइज़्ज़त शुमार न होता। फिर भी जब जागो तभी सवेरा सीवीसी की पहल स्वागत और बधाई योग्य है। पूर्व में प्रशासनिक स्तर पर रिश्वतखोरी, भ्रस्टाचार, आय से अधिक संपत्ति के ग्राफ में काफी तेजी से विकास हुआ है जिसके चलते देश के बुद्दिजीवियों, चिंतकों, कवियों,विचारकों को चिंतन मंथन करने के लिये एक बड़ा पुराण मिल गया है।
सीवीसी ने हाल ही में ये निर्देश जारी किया है कि अब भ्रष्ट अधिकारियों पर अभियोजन के साथ साथ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्यबाही जारी रहेगी। इस पर अब किसी भी बहाने से रोक नही होगी।
सीबीसी ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी अब न्यायलयीन विचारधीन अभियोजन की आड़ में कुर्शी पर नही जमे रह सकेंगे और न ही शान से नोकरी कर सकेंगे।
तयशुदा समय मे उन पर शीघ्र ही बरिस्ट अधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही संपादित की जा सकेगी।
इस निर्देश के वाद उच्च राजनीतिक पहुच वाले रसूखदार तंत्र में बैठे प्रशासनिक अमले पर खतरे के बादल मंडराने लगे है।
देश की जनता ऐसे निर्णय निर्देशों का स्वागत करती है इसके साथ ही पूर्व में हुए इस प्रकार के मामलों को यदि उठाकर कोई एजेंसी त्वरित विभागिय कार्यबाही कुछ भ्रष्ट चहरों पर करती है तो जनता का सीवीसी के इस आदेश पर विश्वास वडेगा।






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