
अपने चहेते पत्रकारों को दे रहे तबज्जो
शिवपुरी। जबसे जिला जनसंपर्क अधिकारी शिवपुरी में दोबारा पदस्थ हुए हैं तभी से विवादों के घेरे में है ये जनसंपर्क अधिकारी की जिला में दोबारा पोस्टिंग है। लगभग चार साल अब गुजर चुके हैं लेकिन पीआरओ अपने चहते पत्रकारों के अलावा किसी को तबज्जो देते नजर नही आते। क्या एक दर्जन पत्रकारों के अलावा शहर में कोई पत्रकार नही है? जनसंम्पर्क कार्यालय में क्या नहीं होता पत्रकारों के लिए आने वाले बजट का बन्दरवाट किस तरह होता है ये किसी से छुपा नही है हाल ही में कोलारस में हुए उपचुनाव के खर्चे की बात की जाए तो जनसंम्पर्क कार्यालय सवालों के घेरे में खड़े नजर आएगा।
पत्रकारों के नाम पर इस उपचुनाव में खाने और परिवहन के नाम पर अनाप शनाप बिलिंग की गई और शासकीय पैसे का कैसे दुरूपयोग किया गया जिसकी अगर जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी होने में देर नही लगेगी। क्या जनसंपर्क अधिकारी के लिए कुछ चुनिंदा पत्रकार ही सबकुछ है और बाकी बचे पत्रकार कोई मायने नही रखते? जनसंपर्क कार्यालय द्वारा उपचुनाव में हुए लाखों के खर्चे का हिसाब लेने वाला अभी तक कोई सामने नही आया है लेकिन यदि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी जाए तो जनसम्पंर्क अधिकारी सवालो के घेरे ने नजर आएंगे।






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