Press "Enter" to skip to content

भाजपा से बगावत कर पर्चा भरने वाले रमेश खटीक ने कहा- मोदी लहर में जब पिता नहीं जीत सका तो अब बेटा क्या जीतेगा

करैरा सीट पर भाजपा से टिकट न मिलने के बाद पूर्व विधायक रमेश ने भरा फार्म
पूर्व विधायक ने भाजपा में टिकट बेचने का आरोप लगाया
शिवपुरी। करैरा विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट न मिलने के बाद गुुरुवार को पूर्व विधायक रमेश खटीक ने पार्टी से बगावत करते हुए सपाक्स उम्मीदवार के तौर पर अपना नाम निर्देशन पत्र दाखिल कर दिया। पर्चा दाखिल करने के बाद भाजपा के पूर्व विधायक रमेश खटीक ने आरोप लगाए कि करैरा विधानसभा सीट का टिकट कुछ नेताओं ने बेच दिया है। यह टिकट धनबल की बजह से लाया गया है। उन्होंने कहा कि जो नेता कुछ सालों पहले तक पार्टी का सदस्य तक नहीं था उसे पार्टी ने टिकट दे दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि भाजपा ने जिस राजकुमार खटीक को टिकट दिया है उनके पिता ओमप्रकाश खटीक को भी वर्ष 2013 में भाजपा ने करैरा से उम्मीदवार बनाया था लेकिन वह 12 हजार से ज्यादा मतों से चुनाव हार गए थे। रमेश खटीक ने कहा कि जब मोदी लहर में उनके पिता चुनाव करैरा से नहीं जीत पाए तो अब उनका बेटा जिसका कोई जनाधार ही नहीं है वह कैसे चुनाव जीतेगा। 

एट्रोसिटी एक्ट में जांच के बाद गिरफ्तारी के पक्ष में रमेश

करैरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट है। यहां पर सपाक्स उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले रमेश खटीक से जब पत्रकारों ने पूछा कि आपने सपाक्स को ही क्यों चुना तो उन्होंने कहा कि मुझे अपने क्षेत्र के लोगों ने चुनाव लड़ने के लिए कहा और इसलिए वह चुनाव मैदान में कूदें हैं। उन्होंने कहा कि एट्रोसिटी एक्ट को लेकर उनका मानना है कि जो नियम पहले था कि एससीएसटी एक्ट में जांच के बाद गिरफ्तारी हो। वह इस नियम के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही गिरफ्तारी होना चाहिए। कुल मिलाकर रमेश खटीक अनूसूचित जाति से आने के बाद भी पुराने एससीएसटी एक्ट के पक्ष में ही नजर आए। 

भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं बागी रमेश

करैरा विधानसभा सीट पर वर्ष 2008 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने रमेश खटीक द्वारा बगावत करने से यहां पर भाजपा का गणित बिगड़ सकता है। वर्ष 2008 में चुनाव जीतने के बाद रमेश का वर्ष 2013 में भाजपा ने टिकट काट दिया था इसके बाद पार्टी ने ओमप्रकाश खटीक को प्रत्याशी बनाया था लेकिन वह 12 हजार से ज्यादा मतों से चुनाव हार गए। इस बार ऐसी संभावना थी कि भाजपा रमेश खटीक को ही मौका देगी लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट काट दिया गया। ऐसे में रमेश खटीक के मैदान में आने से यहां पर मुकाबला चतुष्कोणीय होने के आसार हैं। कारण यह है कि यहां पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा का भी अच्छा खासा वोट बैंक है। बसपा को ही पिछले बार यहां पर 45265 वोट मिले थे। त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार शकुंतला खटीक यहां पर चुनाव जीती थीं। अब भाजपा से नाता तोड़ने वाले रमेश खटीक के आने से यहां पर मुकाबले चारों लोगों के बीच होने के आसार हैं।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!