
शिवपुरी। जिलेभर में आज 19 नवंबर सोमवार को तुलसी विवाह के साथ घर-घर देव उठाए जाएंगे। जिसमें गन्ने, ज्वार का मंडप बनाकर उसके नीचे तुलसी विवाह की रस्म निभाई जाती है। वहीं देवों का आव्हान देवों को उत्तिष्ठ होने की प्रार्थना की जाती है। इसी के साथ हिंदू परंपरा में देव उठने के साथ ही समस्त शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार चार मास से योग निंद्रा में शयन कर रहे भगवान विष्णु को जगाया जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार देव शयन में कोई भी शुभ कार्य सम्पन्न नहीं किया जाता है तुलसी के पौधे से श्री हरि के सालिग्राम रूप का विवाह संपन्न करवाया जाता है। साथ ही गन्ने की पूजा करवाई जाती है। इस दिन गन्ने की पूजा का अत्यंत महत्व है।
एकादशी पर गन्ने की क्योंकि जाती है पूजा
गन्ने को मीठे का शुद्ध स्रोत माना जाता है, ऐसा कहा जाता है कि प्रसाद के रूप में इसे चढ़ाने से जीवन में मधुरता रहेगी और आज से शुरू होने वाले सभी शुभ कार्य शीघ्रता से निर्विघ्न संपन्न होंगे। साथ ही आगे आने वाले मौसम में गन्ना शरीर के लिये भी फायदेमंद भी रहता है। गन्ने से बना गुड़ भी खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक होने से कई लोग भोजन में इसका प्रयोग करते हैं। इस दिन गन्ने के अलावा आंवला, बैगन, सिंघाड़ा, बेर, भाजी भी पूजन में रखी जाती है। ये सभी वस्तुएं सर्दियों में खाई जाती है।
पूजा में अक्षत के बजाय तिल का होता है प्रयोग
देव उठानी के दिन अक्षत के स्थान पर विष्णु पूजा में तिल का प्रयोग किया जाता है। साथ ही वर्ष भर की 24 एकादशियों में भी चावल खाना पूर्णत: वर्जित होता है। पौराणिक आख्यान अनुसार माता शक्ति के भय से भागते ऋषि मेघा ने योगवल से पृथ्वी में समा गए थे। उस दिन एकादशी थी मान्यता अनुसार चावल और जौ ऋषि मेघा के शरीर से ही बने हैं। जबकि वैज्ञानिक मान्यता अनुसार चावल का संबंध जल तत्व से माना जाता है। इस दिन उपवास करने वाले लोग चावल नहीं खाते हैं।






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