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गॉवो मे आज भी जीवित है नाट्य कलायें

गोरमी।राजाओ महाराजाओ के समय से चली आ रही नाट्य कलाय आज के भौतिकवादी युग मे यद्यपि विलुप्त हो चुकी है, लेकिन ग्रामीण अंचल मे इनकी मनमोहक झलक आज भी देखने को मिल जाती है, एक समय था तब आज की तरह मनोरंजन के साधन नही थे, तब ये नाट्य कला ही लोगो का मनोरंजन किया करती थी, समय बदला परिस्थिति बदली और ये कलाये भी धीरे धीरे विलुप्त होने लगी, किन्तु ग्रामीण अंचल मे आज भी इनकी झलक देखने को मिल ही जाती है,
ऐसी ही एक नाट्य कला आज क्षेत्र के ग्राम पंचायत मानहड मे देखने को मिली, यही विठूर  से आये कलाकरो ने अपने पहवानी करतव दिखाकर लोगो के ह्रदय को गद् गद कर दिया,वास्तव इस प्रकार के खेल तमाशे हम मे नया उत्साह भरते है, कुछ नया करने का भाव जाग्रत करते है

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