
शिवपुरी।
फोरलेन खुदाई में हुआ गड्ढा, बनाया तालाब
ग्राम लुकवासा में जब तीसरे तलाब के बारे में ग्रामीणों से आस-पास
पूछा गया तो उन्होंने नाम न छापने की शर्म पर बताया गया कि यहां से फोरलेन
निर्माण के लिए मिटटी उठाई गई थी, जिसके चलते यहां बहुत बडे़ आकार का
गड्ढा बन गया। जिसके बाद गांव के जिम्मेदार लोगों ने इसे तालाब बताकर
मनरेगा से करीब 5 लाख से ज्यादा की राशि से इसे तालाब बता दिया। इसके साथ
ही ग्राम लुकवासा में दूसरे तालाब महुअन वाला के नाम से 6 लाख 53 हजार की
राशि का उपयोग किया गया है। इसी प्रकार भुजरिया वाले तालाब के नाम से भी
करीब 6 लाख 53 हजार की राशि का बंदर बाट किया गया है।
अभी भी बताया निर्माण जारी है
ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए इन तालाबों को देखकर लगता है कि
इनमें ग्राम पंचायत जो राशि खर्च करना बता रही है। इसकी 20 प्रतिशत राशि की
व्यय की गई होगी शेष राशि का बंदरवाट कर दिया गया है। खासबात यह है कि
पैसे का आहरण होने के बाद भी इन दोनों तालाबों का निर्माण कार्य आज भी जारी
बताया जा रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है की किस कदर मनरेगा के
नाम पर गड़बड़ियां की जा रही हैं।
तालाब की पार हुई गायब
करीब 5 लाख 24 हजार की लागत से तालाब का अगर जीर्णोद्धार किया
गया, जिसमें तालाब की खुदाई में निकलने वाली मिटटी की बड़ी पार होना आवश्यक
है। इतने बड़े तालाब से करीब 1 लाख घन मीटर के करीब मिटटी निकलना चाहिए
लेकिन तालाब के आस-पास दूर-दूर तक नजर दौड़ाने पर न तो नवागत पार नजर आई न
ही मिटटी। ऐसे में मिटटी का न होना सवालों के घेरे में है।
कोलारस ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लुकवासा में सरकार की
महत्वपूर्ण योजना मनरेगा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं हैं। जहां
कागजों में ही तालाब का जीर्णोद्धार कार्य कराकर तालाब के नाम पर लाखों
रुपए की राशि का भुगतान कर दिया गया। जानकारी के लिए बता दें की वर्ष
2017-18 में तीन तालाबों के जीर्णोद्धार के कार्य लाखों की लागत से कराए गए
थे। जिनमें से पहला तालाब अनाज मंडी के पीछे स्वीकृत हुआ था, जिसका कार्य
पूर्ण बताया जा रहा है, लेकिन इस तालाब के जीर्णोद्धार के लिए करीब 5 लाख
24 की राशि खर्च बताई जा रही है। वहीं दूसरा मंडी के पीछे वाला तालाब लाखों
की राशि खर्च कर बनाया तो गया लेकिन न तो तालाब की पिचिंग हुई न ही तालाब
का सही गहरीकरण हुआ। इसी प्रकार सबसे आश्चर्य की बात मामले में सामने आई की
मंडी के पीछे बाले जिस तालाब के नाम से लाखों की राशि निकाली गई वह गांव
में तालाब ही नहीं है। ग्राम पंचायत ने कागजों में ही तालाब बना दिए गए
हैं।






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