शिवपुरी।खेतों में कड़ी मेहनत कर खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की समर्थन मूल्य पर खरीदी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर पिपरसमां स्थित बालाजी वेयर हाउस पर तीन-तीन सोसाइटियों के खरीदी केंद्र बना दिए गए हैं। जगह की कमी होने से यहां किसानों की भीड़ अधिक है। तुलाई में भी वक्त लग रहा है। ऐसे में हालात यह हैं कि किसान चार से पांच दिनों से लाइन में लगे हैं। उपज चोरी न हो जाए, इसलिए सर्द रातें भी खुले में बिताने को मजबूर हैं। सर्दी की चपेट में आने से कई किसान बीमार हो गए हैं, फिर भी वे दवाइयां खाकर मौके पर ही डटे हैं।
बालाजी वेयर हाउस पर सोसाइटियों पर 3 से 4 ट्रॉली ही उपज ही तौली जा रही है जिससे अन्य किसानों का नंबर तक नहीं आ पा रहा है। सबसे अधिक परेशानी में गरीब किसान हैं जो सर्द रातें खुले में बिता रहे हैं। सर्दी से बचने के लिए अलाव जलाकर उसी के सहारे रातें बिता रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर से दूर खरीदी केंद्र होने से किसानों का नहाना तो दूर खाना-पीना भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। इन किसानों की सुध न सत्ता में आई कांग्रेस के किसी नेता ने ली न भाजपा के नेता ने। यहां तक कि प्रशासन की तरफ से भी कोई अधिकारी मौके पर खरीदी का जायजा लेने नहीं जा रहा। इस कारण अव्यवस्था के बीच खरीदी चल रही है।
समर्थन मूल्य पर ऐसी खरीदी… जहां तीन केंद्र वहां जगह इतनी कम कि पूरे दिन में 3 से 4 ट्रॉली उपज ही तौली जा रहीं
खरीदी केंद्र पर किसानों की बुरी स्थिति, कोई सुनवाई नहीं
सर्द रात जमीन पर बिताने से हल्केराम बीमार
किसान हल्केराम जाटव निवासी नयागांव ने बताया कि सोमवार शाम 4 बजे गोदाम पर उपज लेकर आया हूं। पंजीयन कराने के बाद लोडिंग वाहन में नौ बोरी मूंगफली लाया हूं। 100 रुपए बोरी भाड़ा देना है। दो दिन में गाड़ी दस कदम आगे बढ़ी है। अलाव जलाकर जमीन पर ही सोना पड़ रहा है। सर्दी अधिक होने से बुखार आ गया। दूसरा किसान मेडिकल से दवा ले आया। दवा खाने से कुछ आराम है। यहां सोने, खाने-पीने के कोई इंतजाम नहीं है।
बेटे को ट्रॉली पर छोड़ा, इलाज कराने अस्पताल आया
ग्राम बछौरा निवासी किसान नंदकिशोर धाकड़ ने बताया कि उड़द बेचने वह शनिवार से ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आया। यहां रात में सर्दी अधिक होने से बीमार हो गया। गला बैठ जाने से ठीक से बात तक नहीं कर पा रहा हूं। बेटे धर्मेश को ट्रॉली पर बिठाकर इलाज कराने अस्पताल आया हूं। नंबर कब तक आएगा, सोसाइटी प्रबंधक नहीं बता रहा। लंबी लाइन लगी है, कोई सुध लेने वाला नहीं है।
50 किमी दूर से आए, हर दिन 2-3 ट्रॉली तुल रहीं
किसान रघुवीर सिंह धाकड़ 50 किमी दूर सेंवड़ा गांव से मूंगफली लेकर बेचने आया है। किराए से ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आए हैं। लाइन लंबी है इसलिए इंतजार में ट्रॉली पर ही सो जाते हैं। इंतजार कब खत्म होगा, यह बताने वाला कोई नहीं है। क्योंकि हर दिन 2 से 3 ट्रॉली ही तुल रहीं हैं। जिससे हमारा नंबर ही नहीं आ रहा है। मजबूरी ऐसी है कि बासी रोटी खाकर काम चलाना पड़ रहा है
80 किमी दूर आए, हर दिन 1500 रु. भाड़ा लग रहा
किसान रामलखन बघेल निवासी खांदी ने बताया कि गांव से 80 किमी दूर खरीदी केंद्र पर मूंगफली बेचने आए हैं। रविवार से यहां खुले में रातें बिता रहे हैं। हमारा शिवपुरी शहर में भी कोई मिलने जुलने वाला नहीं है। मेटाडोर भाड़े पर लाए हैं जिसका हर दिन 1500 रुपए किराया देना पड़ रहा है। उपज कब तुलेगी, हमें कोई बताने वाला नहीं हैं। चार दिनों से नहाए नहीं हैं। यहां पीने का पानी तक नहीं है।






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