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गेहूं के उपार्जन के कम पंजीयन पर नाराज कलेक्टर, बैठक कर अधिकारियों को दिए निर्देश-shivpuri news

पंजीयन की अंतिम तिथि 23 फरवरी
शिवपुरी। रबी विपणन वर्ष 2019-20 के लिए शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर गेहूं के उपार्जन के लिए अभी तक जिन कृषकों के पंजीयन किए गए हैं वह संतोषजनक नहीं है, इसके लिए किसानों को विभिन्न माध्यमों से देने के साथ कृषि ग्रामीण विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों के पंजीयन कराए। यह बात कलेक्टर अनुग्रहा पी ने जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर किसानों द्वारा गेहूं उपार्जन के लिए कराए जा रहे पंजीयन कार्य की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में अपर कलेक्टर अशोक कुमार चौहान, जिला पंचायत के सीईओ राजेश जैन मौजूद थे। 
कलेक्टर अनुग्रहा पी ने शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर जिले में अभी तक लगभग 3 हजार से अधिक किसानों के पंजीयन पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्य में गति लाए। अतः किसानों को विभिन्न माध्यम से जानकारी प्रदाय कर उन्हें बताया जाए कि जिले में बनाए गए 28 उपार्जन केंद्रों में से किसी भी केंद्र पर जाकर वह अपना पंजीयन करा सकते है। इसके लिए आवेदन पत्र पंजीयन केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है। कृषकों को पंजीयन के लिए निर्धारित आवेदन पत्र के साथ आधार नंबर, समग्र परिवार आईडी तथा मोबाइल नंबर, राष्ट्रीयकृत अथवा शेड्यूल्ड बैंको में स्वयं का एकल खाता नंबर, संयुक्त खाता मान्य नहीं, बैंक ब्रांच का नामए आईएफएससी कोड तथा बैंक पासबुक की छायाप्रति, भूमि खाते.खसरा, ऋण पुस्तिका वनाधिकार पट्टे आदि के दस्तावेजी साक्ष्य की प्रतिए भूमि स्वयं के नाम पर न होने पर भू.स्वामी के साथ निर्धारित प्रारूप में सिकमी, बटाई अनुबंध की प्रति आवश्यक रूप से साथ में संलग्न करनी होगी।
शासन के निर्देशानुसार जिले में 28 पंजीयन केंद्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक रविवार एवं शासकीय अवकाश छोड़कर सभी कार्य दिवसों में पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। जिसकी अंतिम तिथि 23 फरवरी है। तीन अन्य पंजीयन केंद्रों के प्रस्ताव भी शासन को भेजे गए है। कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने अनुभाग के तहत आने वाले केंद्रों पर जाकर निरीक्षण कर पंजीयन के संबंध में जानकारी लें। शिवपुरी जिले में इस वर्ष रवी फसल सीजन के तहत लगभग 1 लाख 64 हजार हेक्टर क्षेत्र में गेहूं की फसल की बोनी की गई है। जबकि गत वर्ष 71 हजार 480 हेक्टेयर क्षेत्र में ही गेहूं की बोनी हुई थी।
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