आर्य समाज मंदिर में श्रीरामकथा समापन आज, आर्शीवचनों में उमड़े श्रद्धालुजन, किया यज्ञ
शिवपुरी। श्रीराम, यह वह नाम है जिसमें पूरे संसार का सार छिपा हुआ है। यदि इस धरती के संसारी प्राणी मनुष्य ने राम नाम का जप कर लिया और श्रीराम के आदर्शों को अपनाया तो वह मनुष्य कभी विफलता, अज्ञानता और विधर्मी नहीं हो सकता बल्कि सही अर्थों में वह श्रीराम का अनुगामी होगा। श्रीराम नाम का यह महत्व पुरातन काल से वेदों ने ही जन-जन को दिया है वेद बताते है कि आज के इस युग में प्रत्येक मनुष्य को श्रीराम का चरित्र धारण करना चाहिए। श्रीराम नाम की इस महिमा का बखान किया प्रसिद्ध वेद वक्ता अंजली आर्या ने जो स्थानीय आर्य समाज मंदिर में आर्यजन बिल्लू भैया परिवार द्वारा आयोजित श्रीरामकथा आर्शीवचनों को उपस्थित श्रद्धालुजनों के बीच अपने मुखारबिन्द से श्रवण करा रहीं थी। इस दौरान मध्यभारत आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान इन्द्रप्रकाश गांधी ने सुश्री अंजली आर्या को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में वेद वक्ता अंजली आर्या ने सुबह 8:30 बजे से आर्य समाज मंदिर में यज्ञ कराया और उसके बाद मंत्रों के अर्थ और उसके प्रभावों को बड़ी बारीकी से समझाया। इसके बाद आयोजित श्रीरामकथा में अंजली आर्या ने बड़े ही सुंदर और प्रेरक ढंग से वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम-सीता विवाह, पति-पत्नी के रिश्तों के आधार और कैकयी व मंथरा के बीच संवाद का वर्णन बड़े सुंदर वाणी में श्रवण कराया जिसे सुनकर आर्य समाज मंदिर में उपस्थित सारे श्रोतागण मुग्ध होकर भाव-विभोर हो गए। कथा में आज श्रीराम को जहां माता कैकयी का आत्मीय प्रेम था तो वहीं मंथरा ने जिस प्रकार से कैकयी को अपने शब्दों के मायाजाल में फंसकर राम के विरूद्ध कर दिया और श्रीराम को वनवास दिला दिया। वहीं ऐसे ही कई कैकयी और मंथरा आज के इस युग में भी है इसलिए ध्यान रखें और कैकयी व मंथरा जैसे प्रसंगों से सद्प्रेरणा लें ना कि किसी भी प्रकार के लोभ, मोह-माया में फंसे और दूसरों को भी भटकाव में ना लाएं और ना ही उन्हें भड़काएं। श्रीरामकथा का आज समापन है जिसमें सुबह 8:30 बजे से हवन यज्ञ होगा तत्पश्चात हवन पुर्णाहुति में आहुतियां दी जाएगी।





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