िशवपुरी के रचनाकारों ने पुलवामा में शहीद अमर सेनानियों को अर्पित की काव्यांजली
शिवपुरी। मध्यप्रदेश लेखकसंघ भोपाल इकाई षिवपुरी के संयोजन में शिवपुरी के तमाम रचनाकारों और साहित्यिक संस्थाओं ने कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए जवानों को अपनी श्रृद्धांजली, काव्यांजली के रूप में अर्पित की। इसके साथ ही उनकी स्मृति में पुष्पांजली अर्पित कर मोमबत्तियों को भी प्रज्ज्वलित किया गया। पटेलनगर के पटेलपार्क में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् पुरुषोत्तम गौतम ने की, मुख्य अतिथि के रूप में वज्मे उर्दू के सदर आफताब आलम और विशिष्ट अतिथि के रूप में लेखक संघ के संरक्षक वरिष्ठ गीतकार हरीशचन्द्र भार्गव, डाॅ. हरीप्रकाश जैन हरि, पटेलपार्क के प्रबंधक अशोक अग्रवाल मौजूद रहे। साहित्यिक संस्थाओं में मप्र लेखक संघ के अलावा वज्में-उर्दू, वज्में-अदब, जनवादी लेखक संघ, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रगतिषील लेखक संघ आदि संस्थाओं के सदस्यों और पदाधिकारियों उपस्थित थे।
मप्र लेखक संघ भोपाल इकाई शिवपुरी के अध्यक्ष और संयोजक अरुण अपेक्षित ने पुलवामा में सीआरपीएफके काफीले पर हुए कायराना हमले की निंदा करते हुए कहा कि आज पूरे देश में शोक का वातावरण है। प्रत्यके भारतीय के ह्दय में आतंकियों के प्रति आक्रोश तथा घृणा है। हम सभी अपनी विनम्र श्रृद्धांजली अपने अमर-सेनानियों के प्रति अर्पित करने आज यहां एकत्रित है।
सेनानियों के प्रति श्रृद्धांजली काव्यांजली का प्रारंभ संचालन कर रहे डाॅ. मुकेश अनुरागी ने सरस्वती वंदना और मुवीन अहमद मुवीन ने नातिया कलाम के साथ किया। इसके बाद कवि ष्यामबिहारी सरल ने अपनी रचना में विष्वपटल से आतंकी हत्यारों को मिटा देने का आवाहन किया। कैलाश जैन ने देश के योद्धाओं की फड़कती भुजाओं का उल्लेख करते हुये पूछा कि हमारा बदला आखिर कब पूरा होगा। हास्य रस के कवि राजकुमार चैहान भारती ने भी अपनी ओजस्वीवाणी में आर-पार की हो जाने का आवाहन किया। कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अषोक सक्सेना ने अपनी कविता में कहा- धूं धूं कर चिता जल रही, देश के वीर जवानों की, नम आंखों से नमन कर रही, सीमा के रखवालों की। अरुणेश शर्मा रमन ने पाकिस्तान के लिये कहा कि बहुत दिखाया दर्पण उनको अब उनका तर्पण करना होगा। युवा कवि सत्यम नायक ने सचेत करते हुए देश के व्यवस्थापकों को कहा कि-पृथ्वीराज की भूलों वाले, पन्नों को अब मत खोला। विनोद अलवेला ने पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने की बात कही तो प्रकाशचन्द्र सेठ ने कहा कि उस योग्यता का क्या अर्थ है जिसका समय रहते उपयोग न किया जा सके। डाॅ.रविन्द्र किषोर सक्सेना ने अपनी कविता में कहा कि खामोषी की आहट से दरक उठे हैं कांच, अष्कों की धारा नहीं, रोक पाई बेचैनी। हास्य रस के कवि राम पंडित ने भी देष की स्थितियों को सामने रखते हुए पूछा-राह चलत विस्फोट हो रहे, फटे रोज ही बम, घर बैठे घट रहे हादसे, कहां सुरक्षित हम। डाॅ. मुकेश अनुरागी ने अपनी रचना में कहा कि सिपाही हमारे देश के सजग प्रहरी हैं जो देष की लाज रखते हैं। शायर मुवीन अहमद मुवीन ने कहा कि ये वतन, ये वतन, ये वतन, तुझ पै कुर्वां जानो-तन। नवगीतकार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष विनयप्रकाष नीरव ने कहा-हमारी कोई भाषा हो, धरम हो, ओंठों पर बस वंदे मातरम हो। शायर याकूब साबिर ने कहा- नफरतों का पतन जरूरी है, शुद्ध वातावरण जरूरी है। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष सुकून षिवपुरी ने दहषतगर्दो से प्रष्न किया कि-देहषतगर्द क्या सीखा तुमने, कुर्रां के पैगाम से, अपनी खूंरेजी को तुमने जोड़ दिया इस्लाम से। इशरद हिन्दुस्तानी ने कहा- लाख बार सर झुकाऊंगा, उनकी षहादत में, जो शहीद हो गये हमारी हिफाजत में। लेखक संघ की शिवपुरी इकाई के अध्यक्ष अरुण अपेक्षित ने इस अवसर पर अपनी रचना में कहा-सूख चुके हैं आंख के आंसू, चुके धैर्य के कोष, आज देश के रोम-रोम से फूटा है आक्रोष। गीतकार डाॅ. हरिप्रकाश जैन ने अपने गीत में भारत-भूमि की वंदना करते हुये अमर शहीदों का श्रृद्धांजली अर्पित की-मांटी में खेले जिसके, पल कर बड़े हुये, माॅ भारती के चरणों में करते हैं हम नमन। अशोक मोहित, अनिल रघुवंशी, भगवानसिंह रघुवंशी भी इस अवसर पर अपनी राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया। इसके उपरांत वयोवृद्ध गीतकार हरीशचन्द्र भार्गव ने कहा-रंगों से नहलाते, नेह बरसाते हैं, प्राणों को महकाते हैं। मुख्यअतिथि आफताब आलम ने आवाहन किया-अंधेरीरात में एक दीपक जलाया जाये, जो उदास हैं उनको हंसाया जाये। सबसे अंत में अध्यक्षता कर रहे श्री पुरुषोत्तम गोतम ने भी अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीकृष्ण सरल की कविताओं का उद्धरण देते हुए वीरों को अपना नमन अर्पित किया। सबसे अंत में सभी रचनाकारों के द्वारा अमर-षहीदों की याद में मोमबत्तियों को प्रज्ज्वलित किया गया और दो मिनिट का मौन धारण कर श्रृद्धांजली अर्पित की गई। आभार का प्रदर्षन इकाई अध्यक्ष अरुण अपेक्षित के द्वारा किया गया।






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