
शिवपुरी। शहर के पीएस होटल के पीछे भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का बुधवार को दूसरा दिन था। कथा वाचक कल्याणचंद्र नानौरा वालों ने परीक्षित का जन्म, कलियुग का प्रवेश, कर्दम ऋषि व देवाहुति के विवाह के बाद जन्मे कपिल भगवान की कथा का सारगर्भित वृतांत सुनाया।
उन्होंने बताया कि कर्म के अनुसार मनुष्य जन्म मिलता है तब जन्म से मृत्यु तक जीव सुख की तलाश में रहता है। उसे वह सुख केवल भागवत प्रेम से ही प्राप्त होता है। आचार्य ने प्रेमाभाव का विस्तार से वर्णन कर समझाया कि कलयुग में भगवान का केवल मात्र सुमिरन करने से ही भवसागर को पार किया जा सकता है।
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में परीक्षित के जन्म का वर्णन किया गया
कथा में परीक्षित जन्म का विस्तार से वर्णन किया। कथा के अंत में कपिल चरित्र का भी वर्णन किया। उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि कपिल भगवान ने माता देवहूति से कहा कि ये आसक्ति ही सुख दुख का कारण है। यदि संसार में ये आसक्ति हैए, तो दु:ख का कारण बन जाती है।
यही आसक्ति भगवान और उनमें भक्ति में हो जाए तो मोक्ष का द्वार खुल जाता है। ऋषभ देव के चरित्र वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को ऋषभ देव जी जैसा आदर्श पिता होना चाहिए। जिन्होंने अपने पुत्रों को समझाया कि इस मानव शरीर को पाकर दिव्य तप करना चाहिए। जिससे अंत: करण की शुद्धि हो तभी उसे अनंत सुख की प्राप्ति हो सकती है। भगवान को अर्पित भाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप है। कथा में आचार्य गोस्वामी जी के द्वारा कई भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।






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