प्रियदर्शनी राजे ने महाविद्यालय में छात्र छात्राओं से किया संवाद
शिवपुरी।
शिक्षा सिर्फ स्कूल और कॉलेज से ही नहीं बल्कि लाइफ से भी मिलती है। सीखने
की कोई उम्र नहीं होती। जिंदगी से हर पल सीखा जा सकता है। मेरी शिक्षा भी
अभी समाप्त नहीं हुई बल्कि अभी भी चल रही है। मैं अपने बच्चों से और आप
जैसे युवाओं से भी सीखती हूं। मेरे बच्चे मुझे फेसबुक और व्हाटसएप चलाना
सिखाते हैं। उक्त उदगार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नि
प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने आज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित
छात्र संवाद के दौरान एक विद्यार्थी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में
व्यक्त किए। प्रियदर्शनी राजे से पूछा गया था कि वह अपने छात्र जीवन के
बारे में कुछ बताएं। युवाओं ने उनसे यह भी पूछा कि किसी भी रास्ते पर आगे
बढऩे के लिए परेशानियां होती हैं और ऐसे में हम कैसे रास्ता बनाएं? हम अपने
जीवन को कैसे बेहतर बना सकते हैं?
शिक्षा सिर्फ स्कूल और कॉलेज से ही नहीं बल्कि लाइफ से भी मिलती है। सीखने
की कोई उम्र नहीं होती। जिंदगी से हर पल सीखा जा सकता है। मेरी शिक्षा भी
अभी समाप्त नहीं हुई बल्कि अभी भी चल रही है। मैं अपने बच्चों से और आप
जैसे युवाओं से भी सीखती हूं। मेरे बच्चे मुझे फेसबुक और व्हाटसएप चलाना
सिखाते हैं। उक्त उदगार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नि
प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने आज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित
छात्र संवाद के दौरान एक विद्यार्थी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में
व्यक्त किए। प्रियदर्शनी राजे से पूछा गया था कि वह अपने छात्र जीवन के
बारे में कुछ बताएं। युवाओं ने उनसे यह भी पूछा कि किसी भी रास्ते पर आगे
बढऩे के लिए परेशानियां होती हैं और ऐसे में हम कैसे रास्ता बनाएं? हम अपने
जीवन को कैसे बेहतर बना सकते हैं?
प्रियदर्शनी राजे ने एक एक
सवाल का जवाब काफी विस्तारपूर्वक दिया और विषय और जिज्ञासा को पूरी तरह से
स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि लेसन हमें लाइफ से मिलते हैं,
बच्चों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि
लड़कियों के ड्रीम बहुत बदल गए हैं। पहले तो हमारे जमाने में लड़कियां जब
कहती थीं मुझे फैशन डिजाइनिंग करनी है तो तमाम सवाल खड़े किए जाते थे उस
समय उतने कैरियर ऑप्शन भी नहीं थे। अब तो पूरा जहां उनके लिए खुला हुआ है।
अपने संदर्भ में प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि उनकी एज्यूकेशन अभी खत्म नहीं
हुई है बल्कि अभी भी चल रही है। एक छात्र ने उनसे पूछा कि मै राजनीति में
जाना चाहता हूं, लेकिन बहुत सारी परेशानियां सामने आ जाती हैं। इस सवाल के
जवाब में प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि अपनी रूचि के अनुसार ही कैरियर चुनना
चाहिए। किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए होमवर्क बेहद जरूरी है।
सवाल का जवाब काफी विस्तारपूर्वक दिया और विषय और जिज्ञासा को पूरी तरह से
स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि लेसन हमें लाइफ से मिलते हैं,
बच्चों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि
लड़कियों के ड्रीम बहुत बदल गए हैं। पहले तो हमारे जमाने में लड़कियां जब
कहती थीं मुझे फैशन डिजाइनिंग करनी है तो तमाम सवाल खड़े किए जाते थे उस
समय उतने कैरियर ऑप्शन भी नहीं थे। अब तो पूरा जहां उनके लिए खुला हुआ है।
अपने संदर्भ में प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि उनकी एज्यूकेशन अभी खत्म नहीं
हुई है बल्कि अभी भी चल रही है। एक छात्र ने उनसे पूछा कि मै राजनीति में
जाना चाहता हूं, लेकिन बहुत सारी परेशानियां सामने आ जाती हैं। इस सवाल के
जवाब में प्रियदर्शनी राजे ने कहा कि अपनी रूचि के अनुसार ही कैरियर चुनना
चाहिए। किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए होमवर्क बेहद जरूरी है।
लगता
है कि मेरे हसबैंड अचानक राजनीति में आ गए, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने 13
साल की उम्र से अपने पिता के साथ जाना शुरू किया और उनसे बहुत कुछ सीखा।
हमारे बच्चे भी हमारे साथ जाते हैं और सीखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति
के लिए हमारे मायने अलग हैं। हमारे लिए राजनीति पब्लिक सर्विस (जनसेवा) है।
उन्होंने कहा कि यदि आप कांग्रेस में जाना चाहते हैं या किसी अन्य दल में
जाना चाहते हैं तो देखिए कि उस दल की विचारधारा क्या है? क्या उसकी
फिलोशिपी आपके विचारों से मिलती है? इसके बाद समान विचारधारा वाले लोगों से
संवाद बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आप मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री
या अन्य महत्वपूर्ण पद पाना चाहते हैं तो आपके साथ लोग भी होना चाहिए। बिना
उनके साथ के आगे बढऩा संभव नहीं है। प्रियदर्शनी राजे ने आज कौटिल्य
अकादमी में भी विद्यार्थियों से संवाद किया। यहां वह उनके साथ अंताक्षरी
खेली। इस अवसर पर प्रियदर्शनी राजे के साथ युवा नेता और पार्षद आकाश शर्मा,
सत्यम नाइक, ऊषा भार्गव आदि भी थीं।
है कि मेरे हसबैंड अचानक राजनीति में आ गए, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने 13
साल की उम्र से अपने पिता के साथ जाना शुरू किया और उनसे बहुत कुछ सीखा।
हमारे बच्चे भी हमारे साथ जाते हैं और सीखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति
के लिए हमारे मायने अलग हैं। हमारे लिए राजनीति पब्लिक सर्विस (जनसेवा) है।
उन्होंने कहा कि यदि आप कांग्रेस में जाना चाहते हैं या किसी अन्य दल में
जाना चाहते हैं तो देखिए कि उस दल की विचारधारा क्या है? क्या उसकी
फिलोशिपी आपके विचारों से मिलती है? इसके बाद समान विचारधारा वाले लोगों से
संवाद बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आप मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री
या अन्य महत्वपूर्ण पद पाना चाहते हैं तो आपके साथ लोग भी होना चाहिए। बिना
उनके साथ के आगे बढऩा संभव नहीं है। प्रियदर्शनी राजे ने आज कौटिल्य
अकादमी में भी विद्यार्थियों से संवाद किया। यहां वह उनके साथ अंताक्षरी
खेली। इस अवसर पर प्रियदर्शनी राजे के साथ युवा नेता और पार्षद आकाश शर्मा,
सत्यम नाइक, ऊषा भार्गव आदि भी थीं।






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