
सुनील रजक शिवपुरी। आज रजक समाज ने संत गाडगे बाबा की जयंती मनाई जिसमे रजक समाज के लोग इकट्ठे हुए एवं रजक धर्मशाला पर शाम 4 बजे संत गाडगे बाबा की जयंती मनाई गई।
संत गाडगे बाबा की जयंती हर बर्ष रजक समाज द्वारा मनाई जाती हैं। एवं ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी उपस्थिति देकर संत गाडगे बाबा की जयंती में शामिल होते हैं।
कोन थे संत गाडगे बाबा
सन्त गाडगे महाराज जो कहते थे कि शिक्षा बड़ी चीज है. पैसे की तंगी हो तो खाने के बर्तन बेच दो, औरत के लिए कम दाम के कपड़े खरीदो, टूटे-फूटे मकान में रहो पर बच्चों को शिक्षा दिए बिना न रहो. आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों पर गर्व होना चाहिए, उनमें राष्ट्रीय सन्त गाडगे बाबा का नाम सर्वोपरि है. मानवता के सच्चे हितैषी, सामाजिक समरसता के द्योतक यदि किसी को माना जाए तो वे थे संत गाडगे. 23 फरवरी को देबूजी झिंगरजी जानोरकर या बाबा गाडगे का जन्मदिन है
उनका वास्तविक नाम देबूजी झिंगरजी जानोरकर था. महाराज का जन्म 23 फरवरी, 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अंजनगांव सुरजी तालुका के शेड्गाओ ग्राम में एक धोबी परिवार में हुआ था. गाडगे महाराज एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे. वे पैरों में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे और यही उनकी पहचान थी. जब वे किसी गांव में प्रवेश करते थे तो गाडगे महाराज तुरंत ही गटर और रास्तों को साफ़ करने लगते और काम खत्म होने के बाद वे खुद लोगों को गांव के साफ़ होने की बधाई भी देते थे
कब छोड़ा साथ
उन्हें सम्मान देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 2000-01 में ‘संत गाडगेबाबा ग्राम स्वच्छता अभियान’ की शुरुवात की और जो ग्रामवासी अपने गांवों को स्वच्छ रखते है उन्हें यह पुरस्कार दिया जाता है. महाराष्ट्र के प्रसिद्ध समाज सुधारकों में से वे एक थे. भारत सरकार ने भी उनके सम्मान में कई पुरस्कार जारी किये. इतना ही नही बल्कि अमरावती यूनिवर्सिटी का नाम भी उन्ही के नाम पर रखा गया है. संत गाडगे महाराज भारतीय इतिहास के एक महान संत थे. 20 दिसम्बर, 1956 को महाराज जी चल बसे लेकिन सबके दिलों में उनके विचार और आदर्श आज भी जिंदा हैं
कार्यक्रम में उपस्थित विजय रजक,मंगल रजक,बाबू लाल रजक,शिशुपाल रजक,शंकर रजक,भरोशी लाल रजक, संतोष रजक,सुरेंद्र रजक,रामजीलाल रजक,दीपक रजक,मुकेश उदैया शामिल रहें।






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