मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित
शिवपुरी शहर की साहित्यिक संस्था बज्में उर्दू की मासिक काव्य गोष्ठी गत दिवस गांधी सेवाश्रम में आयोजित हुई। अरूण अपेक्षित की अध्यक्षता में हुई इस काव्य गोष्ठी का संचालन सत्तार शिवपुरी ने किया। डाॅ. मुकेश अनुरागी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
हाल ही में बज्में उर्दू के सचिव रफीक इशरत को उनकी उर्दू जुबान ओ अदव की बहतरीन खिदमत के लिए भोपाल उर्दू अकादमी ने सम्मानित किया उन्हें डाॅ. नुशरत महदी एवं डाॅ. रजा मुराद द्वारा शाल ओढ़ाकर शिफारस नामा (प्रशंसा पत्र) एवं 10000 रू. का चैक प्रदान कर उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामना की। बज्म के सभी मेंम्बरान ने खुशी का इज़हार किया। बज्म को संबोधित करते हुए रफीक इशरत ने कहा ये मेरी कामयाबी नहीं बज्मे उर्दू की कामयाबी है।
’’तरही मिसरे खोटे सिक्के भी काम आते हैं’’ पर लिखे गए प्रमुख अंश देखें
मो. याकूब लिखते हैं,
एेसे नाजुक मकाम आते हैं ।
खोटे सिक्के भी काम आते हैं ।।
वहीं साजिद अमन लिखते है,
जब किसी की मसाल देना हो ।
याद अब्दुल कलाम आते है ।।
वहीं भगवान सिंह यादव ने कहा,
जिन्दगी सारहीन है उनकी ।
जो किसी के न काम आते हैं ।।
इरशाद जालौनबी को देखें,
जो वतन पर हुए शहीदों पर ।
देष भर से सलाम आते हैं ।।
रफीक इशरत ने कहा,
तुम न अपनों से ये उम्मीदें रखो ।
वक्त पर गैर काम आते हैं ।।
राम कृष्ण मोर्य को देखें,
एक दो आते तो में लड़ भी लेता ।
जब भी आए तमाम आते हैं ।।
गैर तरह पर डाॅ. मुकेश अनुरागी ने कहा,
जख्म देने को हैं तैयार खडे़ लोग यहां ।
किसी के हाथ में मरहम यहां नहीं होता ।।
वहीं संजय शाक्य लिखते हैं,
आईना हमें दिखाते हैं ।
आईने से जो खोफ खाते हैं ।।
शरद गोस्वामी लिखते हैं,
हो मुसीबतों की घड़ी या शान्ति का काल हो ।
हर हाल में हो होसला, यह देष चलना चाहिये ।।
सत्तार शिवपुरी ने गीत पढ़ा,
प्रियतम फिर लै आइयो बा होरी सौ रंग ।
अरूण अपेक्षित ने हृदय के बंद कमरे में कोई आये नहीं आये गीत पढ़ा और अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।
अंत में सत्तार शिवपुरी ने सभी साहित्यकारों का आभार प्रकट कर शुक्रिया अदा किया।





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