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महिला सुरक्षा समिति न बनाने वाले कार्यालय प्रमुख पर होगा 50 हजार का जुर्माना -shivpuri news

कलेक्टर ने दिए 15 दिन में समिति गठन के आदेश 
शिवपुरी। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कलेक्टर अनुग्रहा पी ने सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देशित किया है कि अपने अधीन संचालित 10 या 10 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यालय में 15 दिन के भीतर एक आंतरिक परिवाद समिति का गठन करें। समिति गठित होने की दशा में कार्यालय प्रमुख पर 50 हजार रुपए का जुर्माना होगा।
यह आदेश केवल सरकारी कार्यालयों पर ही नहीं बल्कि अशासकीय, अर्द्धशासकीय, निगम, मंडल, बैंक इत्यादि सभी कार्यालयों को यह समिति गठित करनी होगी तथा गठित समिति का बोर्ड कार्यालय के दृश्य भाग में प्रदर्शित करना होगा। समिति में कम से कम 4 सदस्य होंगे जिसमें समिति अध्यक्ष कार्यालय की वरिष्ठ महिला (अधिकारी या कर्मचारी) होगी। समिति के अन्य सदस्यों में दो ऐसे सदस्य होंगे जिनके पास कानूनी ज्ञान, समाज सुधार का अनुभव तथा महिलाओं के मुद्दों को सुलझाने की क्षमता हो। एक सदस्य महिलाओं के लिये कार्यरत गैर सरकारी संगठन या महिलाओं से जुड़े विभाग से होगा।समिति में कुल संख्या में आधी संख्या महिलाओं की होना आवश्यक है।
कलेक्टर ने जिले के सभी शासकीय अशासकीय कार्यालय प्रमुखों को निर्देशित किया है कि यह आदेश लोकहित से जुड़ा होकर बहुसंख्यक संस्थानों से जुड़ा है।सभी जगह आदेश की प्रति पहुंचपाना संभव नहीं है।अखबार में खबर प्रकाशन को ही आदेश की प्राप्ति मानकर समिति गठन की कार्रवाई 15 दिन में पूर्ण कर समिति गठन की जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास को भेजना होगी।
बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि सामाजिक विकास में महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा तथा सम्मान का बेहद महत्वपूर्ण योगदान होता है। हम जिस समाज मे पले बढ़े है,उस समाज में महिलाओं को देवी के रूप में पूजने की परंपरा है,उसके बाबजूद दिन प्रतिदिन बढ़ती महिला हिंसा एवं गिरता नैतिक स्तर चिंता के साथ ही सामाजिक चिंतन का विषय बन गया है।शासन प्रशासन के द्वारा महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण के अनेकों प्रयास किये जा रहे है,किंतु सामाजिक सहयोग के अभाव में सुरक्षात्मक उपाय विफल हो रहे है।वर्तमान में महिला एवं बालिका हिंसा के खिलाफ लड़ाई में सामाजिक भागीदारी की नितांत आवश्यकता है।शासन एवं समाज की संयुक्त भागीदारी से ही इस बुराई को दूर किया जा सकता है।
 जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ओपी पांडेय ने बताया कि महिलाओं के स्वभिमान की रक्षा शासन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। हर कार्यालय में महिलाओं की गरिमा के अनुकूल वातावरण निर्माण के लिए आंतरिक परिवाद समिति वेहद महत्वपूर्ण है। इसे प्राथमिकता से गठित किया जाना चाहिए।
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