
भूमिमाफियाओं की दबंगई के सामने प्रशासन हुआ बौना
शिवपुरी। चांदी के जूते की ताक़त क्या होती है, यदि इसकी सही बानगी देखनी है तो इसका जबाव है शिवपुरी की विष्णुमन्दिर के पीछे तलैया में बसी कॉलोनी। जिसे एक नहीं कई मर्तबा शासकीय जमीन प्रमाणित किया गया, किन्तु चाँदी के सिक्कों की खनक ने जैसे पूरी कायनात को ही खरीद रखा हो। सूबे के आला से आला अधिकारियों के प्रमाणीकरण के बाद भी इस तालाब की भूमि पर शान से चार चार मंजिला इमारतें भूमाफियाओं के हौसलों की तरह बुलन्द हैं।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
पहले एक नजऱ डालते हैं इस तालाब के पुराने मूल इतिहास पर इस जमीन का पुराना सर्वेक्रमांक 56/7, 56/9, 65/3, 65/4 और 65/5 है ।वर्ष 1952 -53 में इसकी मालिक मध्यभारत शासन थी । अब इस जमीन के नये सर्वे क्रमांक 98, 99 और 100 हैं और वर्ष 1961-62 के अनुसार शासकीय खातों में डूब तालाब और नाला दर्ज है । मामले ने तूल तब पकड़ा जब एक जागरूक नागरिक रमेश बाथम ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ ग्वालियर में एक जनहित याचिका क्र.- 8059/2014 (पीआईएल-रमेशचन्द्र बाथम/स्टेट ऑफ म.प्र.) प्रस्तुत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिये।
इसके जवाब में तत्कालीन कलेक्टर शिवपुरी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर अपर कलेक्टर, एस एल आर,एस डी एम और तहसीलदार को संपूर्ण अभिलेखों की जांच सौंपी ।कमेटी ने जांच प्रतिवेदन क्रमांक 01/2014-15 निगरानी द्वारा ज़मीन को शासकीय तालाब भूमि पाया। कलेक्टर द्वारा 14 अगस्त 2016 को आदेश पारित कर इस भूखण्ड को हितवत व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देकर राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश दिये गये।तहसीलदार शिवपुरी के प्रकरण क्रमांक 97/15-16/अ-6-अ म. प्र. शासन बनाम रमेश चन्द्र बाथम में दिनांक 20/03/2017 को भूमि सर्वे क्रमांक 98,99,100 को शासकीय मध्यप्रदेश शासन भूमि घोषित किया गया।
झुठलाया गया निष्पक्ष जांच को
प्रशासन का यह निर्णय इन दबंग भूमाफियाओं से हजम नही हुआ। तहसीलदार के इस आदेश के विरुद्ध तत्कालीन एसडीएम करैरा सी बी प्रसाद के समक्ष प्रकरण क्रमांक 71/2016-17 रंजीत गुप्ता बनाम मध्यप्रदेश शासन अपील पेश की गई ,जिसमें दिनांक 28 /07/2017 को आदेश पारित कर तहसीलदार शिवपुरी का आदेश आश्चर्यजनक रूप से निरस्त किया गया। एसडीएम के करैरा के आदेश के विरुद्ध रमेश बाथम के द्वारा अपील 756/16-17 अपरायुक्त ग्वालियर के समक्ष प्रस्तुत की गई जिसमें अपरायुक्त द्वारा एस डी एम करैरा के आदेश पर स्थगन दिया गया है। किंतु अपरायुक्त के द्वारा दिये स्थगन के बावजूद इस जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए अवैध निर्माण कार्य लगातार किया जा रहा है।
मामला अब न्यायालय में
फरियादी रमेशचन्द्र बाथम ने न्यायालय शिवपुरी में भवन निर्माताओं के विरुद्ध प्रकरण प्रस्तुत कर दिया है। जिसमे कलेक्टर ,तहसीलदार, नगरपालिका सहित भवन निर्माताओं को पक्षकार बनाया गया है।
नपा के नियमों की भी की अनदेखी
अधिकांशत: लोगों ने नगरपालिका की अनुमति के बिना तालाब की भूमि में अवैध रूप से मकानों का निर्माण कर लिया है । नपा द्वारा नोटिस जारी किये गये हैं किन्तु भूमिमाफिय़ाओं के आगे प्रशासन बौना साबित हो रहा है।वहीं नगरपालिका अधिनियम की धारा 339(क)के तहत कॉलोनी निर्माण करने वाले को कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण कराना अनिवार्य है। किन्तु इस तरह का कोई भी रजिस्ट्रेशन इन भूमाफियाओं द्वारा नही कराया गया है।
एन जी टी के निर्देशों की उड़ाई धज्जियाँ
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा विशेषकर शिवपुरी के मामले में तालाब और नाले पर किसी भी प्रकार का निर्माण नही किये जाने के स्पष्ट दिशा निर्देश दिये गये हैं ,इसके बावजूद भी इतना बड़ा फर्जीबाड़ा कारित कर दिया गया।
इनका कहना है
यह प्रकरण पूर्व से प्रचलित है इस प्रकरण का मैं अध्ययन करके और मेरे संज्ञान में जो लाया गया है उस प्रकरण में जो भी होगा उसकी जाँच कराकर निराकरण कराया जाएगा।
केके पटेरिया, सीएमओ नगरपालिका परिषद शिवपुरी






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