
भोपाल। ई-टेंडर घोटाले के खुलासे की शुरुआत जिस जल निगम के टेंडर से हुई थी, वहीं के 16 सौ करोड़ रुपए के ठेके फिर विवादों में आ गए हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद यानी 12 दिसंबर 2018 निगम ने आनन-फानन में टेंडर को अंतिम रूप देकर काम आवंटित कर दिया। इस मामले को संदिग्ध मानते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विभाग को जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चुनाव आयोग को भी इस बारे में लिखा जाएगा, क्योंकि उस वक्त आदर्श आचार संहिता प्रभावी थी।
शहर और ग्रामीण इलाकों में पेयजल समस्या को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को जल निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा की। इस दौरान जल निगम के कामकाज का लेखा-जोखा लिया गया। इसमें यह बात सामने आई कि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक एक दिन बाद 16 सौ करोड़ रुपए के ठेके दिए गए थे। इसमें जबलपुर में 650 करोड़ रुपए की पाइली योजना, दमोह में 450 करोड़ रुपए ब्यारमा परियोजना शामिल थी।
आनन-फानन में ठेके देकर कहीं आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं किया और इतनी जल्दबाजी की वजह क्या थी, इसकी पड़ताल कराई जाएगी। इसके लिए विभाग टीम बनाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराने के साथ चुनाव आयोग की जानकारी में भी यह बात लाई जाएगी। बैठक में जल निगम को मंदसौर, नीमच एवं छिंदवाड़ा जिले में नई परियोजना इकाई स्थापना की मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो भी पेयजल योजना बने, वो समयसीमा में पूरी हो। इसके लिए लागत जुटाने के साथ संचालन और रखरखाव के खर्च का भी आकलन किया जाए। कोशिश यह होनी चाहिए कि वित्तीय आत्मनिर्भरता हो। बैठक में मुख्य सचिव एसआर मोहंती, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एम. गोपाल रेड्डी, अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन, प्रमुख सचिव संजय शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
राइट टू वॉटर एक्ट की प्रोग्रेस क्या है
मुख्यमंत्री ने बैठक की शुरुआत में ही विभागीय मंत्री और अधिकारियों से पूछा कि वॉटर एक्ट की प्रोग्रेस क्या है। अभी तक इस दिशा में कितना काम कर लिया है। इस पर नगरीय विकास के अधिकारियों ने बताया कि मसौदा लगभग तैयार है। अधिनियम का खाका खींचा जाना है। राइट टू वॉटर के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण विकास, नगरीय विकास और वित्त विभाग के अधिकारियों की समिति बनाई गई है।





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