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चमकी बुखार : बेहद खराब है एसकेएमसीएच अस्पताल की हालत, बार-बार बिजली कटौती से रो रहे बच्चे ! Bihar News

SKMCH hospital Muzaffarpur, AES
मुजफ्फरपुर (बिहार) : बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में चमकी बुखार से बच्चों का दम तोड़ना जारी है। मृतक बच्चों की संख्या बढ़कर 112 हो गई है। अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने के स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बहुत खराब हैं। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टरों और बेड्स की कमी है। अस्पताल और उसके आस-पास का परिवेश बेहद खराब है और चारों-तरफ गंदगी फैली हुई है। इलाज कराने आने वाले बच्चों को बिस्तर नहीं मिल पाया है। प्रचंड गर्मी में अस्पताल में बार-बार बिजली की कटौती होने से बीमार बच्चों और उनके परिजनों की हालत खराब है। अस्पताल में गर्मी बर्दाश्त से बाहर होने पर बच्चे रोने लग रहे हैं। हैरान करने वाली बात है कि नीतीश सरकार ने बिजली कटौती से निपटने के लिए अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। 

मुजफ्फपुर के इस एसकेएमसीएच अस्पताल में करीब 100 किलोमीटर के दायरे से लोग बड़ी संख्या में अपना इलाज कराने आते हैं। लोगों को इस अस्पताल से बड़ी उम्मीदें लगी रहती हैं लेकिन अस्पताल के हालत की अगर बात करें तो यहां की सफाई-व्यवस्था भगवान भरोसे है। किसी को इसकी परवाह नहीं कि यहां इलाज के लिए मरीज आते हैं, ऐसे में अस्पताल एवं उसके आस-पास का परिवेश साफ-सुथरा होना चाहिए। अस्पताल के भीतर एवं बाहर इस तरह गंदगी फैली हुई है कि यहां आने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। 
बिजली कटौती से मरीज परेशान, रो रहे बीमार बच्चे
बिहार के कई इलाकों में प्रचंड गर्मी पड़ रही है। राज्य में लू लगने से अब तक करीब 184 लोगों की मौत हो चुकी है। गया में गर्मी एवं लू को देखते हुए प्रशासन ने यहां धारा 144 तक लगाई थी। शनिवार को गया और पटना का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गर्मी की वजह से बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। इससे राज्य में पड़ रही प्रचंड गर्मी का अंदाजा लगाया जा सकता है। एसकेएमसीएच अस्पताल में बिजली का हाल बुरा है। यहां बार-बार बिजली की कटौती हो रही है। यहां लोग गर्मी से राहत के लिए हाथ से बने पंखों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गर्मी बर्दाश्त के बाहर होने पर बीमार बच्चे रोने लग रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है कि बिजली जाने की वह वैकल्पिक व्यवस्था करे। 
बीमारी बनी हुई है रहस्य 
हैरान करने वाली बात है कि इस चमकी बुखार से करीब 112 बच्चों की जान जा चुकी है। यहां लंबे समय से बीमार बच्चों को इलाज के लिए लाया जाता रहा है लेकिन अभी तक इस बीमारी की वजह के बारे में डॉक्टरों को जानकारी नहीं है। बच्चों को यह बीमारी क्यों हो रही है इस बारे में डॉक्टर अब तक कोई ठोस वजह नहीं बता पाए हैं। चमकी बुखार का कारण पता करना डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। बहुत सारे लोगों ने बीमारी की वजह को गर्मी और लीची खाने से जोड़ा है लेकिन यह एक अनुमान है। बच्चों को यह बीमारी क्यों हो रही है इसका सटीक कारण अभी तक नहीं खोजा जा सका है।     
बारिश का इंतजार छोड़ अपनाया जाए वैज्ञानिक नजरिया
इस दौरान इस तरह की बातें भी सुनने को मिली हैं कि बारिश का मौसम आने पर यह बीमारी खत्म हो जाएगी लेकिन बच्चों की जिंदगी बारिश के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। चमकी बुखार को थामने और इस बीमारी की तह तक जाने के लिए वैज्ञानिक नजरिए से शोध की जरूरत है। इस बीमारी से लड़ने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को अपनी मुस्तैदी दिखानी होगी। देश के जाने-माने के डॉक्टरों को इस अस्पताल का दौरा करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि आखिर बच्चे क्यों चमकी बुखार की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसकी असली वजह क्या है। जाहिर है कि इस काम में संसाधनों की जरूरत होगी और इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। 
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