
बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक मरीज 25 वर्षीय डॉक्टर वरन्या के पास उस वक्त पहुंचा, जब वह अपने काम के पहले दिन के अंत में घर जाने की तैयारी कर रही थीं। उसने बताया कि उसके कान में दो दिनों से तेज दर्द हो रहा है। बैंकॉक के राजाविथी हॉस्पिटल में वरन्या ने मरीज के कान की जांच करने के लिए एक ओटोस्कोप का इस्तेमाल किया।
मगर, वह यह देखकर चौंक गई कि मरीज के कान के अंदर कोई कीड़ा रेंग रहा है। उसने कुछ एंटीबायोटिक डॉप्स को आदमी के कान में डाला और उसे अपने सिर को झुकाने को कहा। वरन्या को उम्मीद जताई कि कान के अंदर जो भी बग रेंग रहा है, वह खुद ही बाहर निकल जाएगा। मगर, ऐसा नहीं हुआ। इसलिए उसे निकालने के लिए चिमटी का इस्तेमाल करना पड़ा।
मगर, डॉक्टर और नर्स यह देखकर चौंक गए कि जिसे वह छोटा कीड़ा समझ रहीं थी वह छिपकली थी, जिसे आमतौर पर थाईलैंड में जिंग जोक के रूप में जाना जाता है। वरन्या ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि यह सिर्फ एक छोटा बग नहीं था। यह एक छिपकली थी, जो अभी भी जिंदा थी और कान में हिल रही थी।
उन्होंने लिखा कि यह मेरे दिन का आखिरी मामला था। मैं बहुत उलझी हुई थीं। कान के छोटे से छेद में एक विशाल जेको कैसे रेंग सकता है? जिंग जोक को निकालने के बाद युवा डॉक्टर ने विशेषज्ञ से रोगी के कान को दिखवाया। वह यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि छिपकली की वजह से रोगी के कान का कोई हिस्सा अंदर फटा तो नहीं था, जिससे संक्रमण हो सकता हो।
सौभाग्य से, सब कुछ सही दिखाई दिया और मरीज ने भी ठीक महसूस करने की सूचना दी। फिर भी वरन्या को आश्चर्य हुआ कि दो दिन तक कान के उसे छोटे से स्थान में छिपकली जिंदा कैसे बच सकती है। संभवतः एक लंबे समय तक डॉक्टर के रूप में वरन्या अपने पहले दिन को याद रखेंगी। आखिरकार, यह हर दिन नहीं होता है कि आप एक मरीज के कान में एक लाइव जीको को निकालते हैं।





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