
नई दिल्ली। एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों के लिए एक बड़ी राहत पहुंचाने वाली खबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने प्रस्तावित विधेयक में पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नीट (एनईईटी) प्रवेश परीक्षा को खत्म करने की सिफारिश की है। मंत्रालय का कहना है कि एमबीबीएस के फाइनल नतीजे ही पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पर्याप्त होंगे।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस संशोधन को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक के संशोधित मसौदे में शामिल कर लिया गया है, जिसे मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर विधेयक में इन संशोधनों को शामिल किया गया है।
सूत्रों ने कहा, “ताजा एनएमसी विधेयक में किए गए बदलाओं के मुताबिक पूरे देश में साझा परीक्षा के रूप में आयोजित नेशनल एग्जिट टेस्ट (एनईएक्सटी) के आधार पर पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले होंगे। इस तरह एमबीबीएस की फाइनल परीक्षा पास करने के बाद अभ्यर्थियों को पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए कोई अन्य परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी।”
एम्स में दाखिले के लिए देनी होगी प्रवेश परीक्षा
इसके साथ ही छात्रों को एमबीबीएस की परीक्षा पास करने के बाद प्रैक्टिस करने के लिए भी किसी अन्य परीक्षा में बैठने जरूरत नहीं होगी, परंतु अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए छात्रों को अलग से प्रवेश परीक्षा देनी होगी। इसके अलावा डीएम/एमसीएच कोर्स में दाखिले के लिए भी नीट सुपर स्पेशियालिटी प्रवेश परीक्षा होती रहेगी।
मालूम हो, देश के 480 मेडिकल कॉलेजों में हर साल 80,000 छात्र एमबीबीएस पाठ्यक्रमों दाखिला लेते हैं। पीजी की 50,000 सीटें हैं, जिसके लिए हर साल लगभग 1.5 लाख छात्र प्रवेश परीक्षा देते हैं। चिकित्सा क्षेत्र के लोगों ने किया था विरोधएनएमसी विधेयक को 2017 में संसद में पेश किया गया था
लेकिन 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया था। इस विधेयक को लोकसभा में पेश करने किए जाने पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भारी विरोध किया था, जिसके बाद इसे संबंधित विभाग की संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था। इस विधेयक के जरिए भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) अधिनियम, 1956 के स्थान पर एनएमसी की स्थापना का प्रस्ताव है।
इस अधिनियम में वैकल्पिक चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए “ब्रिज कोर्स” का प्रस्ताव किया गया है, जिसे करने के बाद वो एलोपैथी चिकित्सा में भी प्रैक्टिस कर सकते हैं। संसद की समिति की सिफारिश पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने “ब्रिज कोर्स” को विधेयक से हटा दिया था और कुछ अन्य बदलाव भी किए थे।





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