
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अक्सर अत्याधुनिक चिकित्सा और शोध के लिए सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस बार मरीज और तीमारदारों के साथ सौतेले व्यवहार के कारण चर्चा में है। एम्स ने दिल्ली समेत देशभर से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को कैफेटेरिया में सस्ते दाम पर स्वादिष्ट भोजन का निवाला उपलब्ध कराने के बाद वापस छीन लिया है।
गौरतलब है कि जिस तीन मंजिला कैफेटेरिया का ठेका मरीजों की आड़ में कौड़ियों के दाम निजी कंपनी को दिया गया, उसमें पिछले कुछ दिनों से मरीजों के प्रवेश पर ही रोक लगा दी है। लिहाजा, अब मरीजों और तीमारदारों को एम्स में स्वच्छ स्वादिष्ट भोजन नहीं मिल पाएगा। रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों की शिकायत पर एम्स प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
दूसरे राज्यों से आते हैं 40 फीसद मरीज
नए आदेश के बाद इस कैफेटेरिया को पब्लिक कैफेटेरिया की जगह कर्मचारियों का कैफेटेरिया घोषित कर दिया गया है। एम्स की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 12 हजार मरीज और हजारों तीमारदार पहुंचते हैं। करीब 40 फीसद मरीज अन्य राज्यों के होते हैं। इसके बावजूद एम्स में मरीजों और तीमारदारों के खानपान के लिए सुविधाजनक कैफेटेरिया नहीं था। अमृत फार्मेसी के पास छोटा कैंटीन पहले से जरूर मौजूद है, जहां सीमित चीजें ही उपलब्ध होती हैं। साथ ही स्वच्छता का भी अभाव है।
मरीजों-तीमारदारों को स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना था उद्देश्य
एम्स ने करोड़ों रुपये की लागत से तीन मंजिला कैफेटेरिया बनवाया है। पहले इस कैफेटेरिया में सिर्फ कर्मचारियों के खानपान की सुविधा थी। तब इसका संचालन एम्स के ही कर्मचारी करते थे। हाल ही में महज पांच हजार रुपये किराये पर इसके संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दे दी गई, तब इसका कर्मचारियों ने विरोध भी किया था। उस वक्त एम्स प्रशासन का कहना था कि इस कैफेटेरिया का ठेका कम किराये पर इसलिए दिया गया है, ताकि ओपीडी में पहुंचे मरीज और तीमारदारों को भी सस्ते दाम पर स्वादिष्ट भोजन मिल सके।
खानपान की चीजों की कीमतें भी तय कर दी गई हैं, जिसमें संचालक कंपनी पांच साल तक बदलाव नहीं कर सकती। लेकिन अब कैफेटेरिया में जाने से मरीजों और तीमारदारों को रोक दिया गया है। मरीजों व तीमारदारों का कहना है कि एम्स प्रशासन चाहता तो कैफेटेरिया का पहली और दूसरी मंजिल का हिस्सा डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए आरक्षित कर भूतल पर मरीजों की सुविधा बहाल रख सकता था। हालांकि, फिलहाल भूतल और पहली मंजिल पर ही कैफेटेरिया का संचालन हो पा रहा है, लेकिन दूसरी मंजिल पर भी सुविधा शुरू की जानी है। कर्मियों की मांग पर कैफेटेरिया कमेटी ने लिया फैसला एम्स के उप निदेशक (प्रशानिक) शुभाशीष पांडा ने कहा कि डॉक्टरों और कर्मचारियों ने आपत्ति जताई थी कि मरीजों और तीमारदारों के पहुंचने से कैफेटेरिया में भीड़ बढ़ जाती थी, इसलिए उन्हें परेशानी हो रही थी। इसके मद्देनजर कैफेटेरिया कमेटी ने यह फैसला किया कि इसका इस्तेमाल सिर्फ कर्मचारी करेंगे। मरीजों और तीमारदारों को पहले से निर्धारित कैंटीन (अमृत दवा स्टोर के पास) में ही खानपान की सुविधा मिलेगी।
एम्स में पांच कैफेटेरिया, सभी कर्मचारियों के लिए
मौजूदा समय में एम्स में पांच कैफेटेरिया हैं। ये सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए ही हैं। इसके अलावा हॉस्टल में भी मेस है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या देश भर से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों के लिए एम्स में स्वच्छ भोजन की सुविधा उपलब्ध नहीं होनी चाहिए? एम्स की अनदेखी के कारण मरीज और तीमारदार सड़क किनारे बिकने वाला दूषित भोजन खाने को विवश होते हैं और बीमार भी पड़ते हैं।





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