
नई दिल्ली। आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट्स में मकान बुक कराने वालों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को नोएडा और ग्रेटर नोएडा स्थित आम्रपाली के अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पूरा करने और ग्राहकों को सौंपने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली और उसके निदेशकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ग्रुप की सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सीएमडी अनिल शर्मा समेत अन्य निदेशकों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
शीर्ष अदालत ने आम्रपाली के निदेशकों की संपत्तियां कुर्क करने का भी आदेश दिया। फिलहाल आम्रपाली के सीएमडी समेत अन्य निदेशक जेल में बंद हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आम्रपाली ग्रुप के उन हजारों ग्राहकों को राहत मिलेगी, जिन्हें फ्लैट की रकम चुकाने के बावजूद कब्जा नहीं मिल पाया है। ये खरीदार पिछले कई वर्षों से फ्लैट के लिए कंपनी के चक्कर लगा रहे हैं।
रेरा रजिस्ट्रेशन भी रद्द
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने फैसले में कहा कि आम्रपाली ग्रुप की सभी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाएं। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि आम्रपाली का रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (रेरा) का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया जाता है।
हजारों ग्राहकों को राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आम्रपाली के तमाम प्रोजेक्ट्स में 42 हजार से ज्यादा मकान ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्र की अध्यक्षता वाली बेंच ने बीते 10 मई को हुई सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।






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