
उज्जैन। श्रावण मास की भगवान महाकाल की दूसरी सवारी धूमधाम से निकली। महाकाल दो रूपों में अपने भक्तों को दर्शन देने निकले। राजाधिराज रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर तथा हाथी पर मनमहेश रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले।
परंपरा अनुसार शाम 4 बजे शाही अंदाज में सवारी शिप्रा तट की ओर रवाना हुई। मंदिर के सभा मंडप में पुजारियों ने भगवान चंद्रमौलेश्वर व मनमहेश का पूजन किया। पूजन पश्चात सवारी नगर भ्रमण के लिए निकल गई। महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए पालकी मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी।
यहां पुजारी शिप्रा तथा शिप्रा जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजा अर्चना करेंगे। पूजन पश्चात सवारी रामानुजकोट, गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबारोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए पुन: मंदिर पहुंचेगी।
मंदिर के मुख्य द्वार तथा शिप्रा तट पर पूजन के पश्चात सशस्त्र बल के जवान राजाधिराज को सलामी देते हैं। सवारी में अश्वरोही दल, पुलिस बैंड, सशस्त्र बल की टुकड़ी, भजन मंडलिया, झांझ डमरू दल शामिल हैं।





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