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मामला बैराड कालामढ पट्टाकाण्ड प्रशासन की मिलीभगत के चलते वनग्राम की भूमि माफियाओं के हवाले | Bairad News

शासकीय चरनोई भूमि पर कराये अवैध पट्टे
दोषी अधिकारी/कर्मचारियों पर एफआईआर के बावजूद नहीं हुई गिरफ्तारी
बैराड। शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग अंतर्गत बैराड नगर पंचायत क्षेत्र के कालामढ ग्राम पंचायत के रकवे में स्थित शासकीय चरनोई की भूमि पर प्रशासन के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते क्षेत्र के भू-माफियाओं ने अवैध पट्टे कराकर संबंधित वनग्राम की भूमि को पूरी तरह से अपने कब्जे में कर लिया। आज से लगभग 8 वर्ष पूर्व जब बैराड क्षेत्र के ग्राम पंचायत कालामढ की शासकीय चरनोई भूमि जो वनग्राम की भूमि के नाम से शासन द्वारा स्वीकृत थी। जब भू-माफियाओं को इस भूमि के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने गुपचुप रूप से तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार, आरआई एवं अन्य राजस्व के अधिकारियों, कर्मचारियों से मिलीभगत कर अपना काम बनाने के लिये खिला-पिलाकर आनन-फानन में अवैद्यानिक रूप से उक्त भूमि के पट्टे एवं कब्जा प्राप्त कर कालामढ की वनग्राम चरनोई भूमि को अपने नाम कराने में कामयाबी हासिल कर ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार जब इस पूरे प्रकरण का पता आमजन एवं जनप्रतिनिधियों को चला तो उन्होंने तत्कालीन समय में इस मुद्दें को पुरजोर उठाते हुये प्रशासन एवं शासन के संज्ञान में लाया गया। संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ अवैद्यानिक रूप से पट्टे एवं कब्जा मिले हुये भूमाफियाओं को करने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। उस समय यह मामला कालामढ पट्टाकाण्ड के नाम से इतना विख्यात हुआ कि इस प्रकरण में कई उच्च अधिकारी भी जांच की जद में पाये गये। लेकिन समय एवं सत्ता परिवर्तन के चलते आनन-फानन में इस मुद्दें को दबाने का पूरा प्रयास इसलिए किया गया क्योंकि इसमें प्रशासन के कई अधिकारी एवं कर्मचारी जांच की जद में आ चुके थे। यदि वास्तविक रूप से तत्कालीन समय में जांच की जाती और उजागर हुये मामले को दबाया नहीं जाता तो आज इस प्रकरण के वास्तविक दोषी अधिकारी एवं कर्मचारी दण्ड के भागीदार सिद्ध होते हुये सलाखों के पीछे होते। वर्तमान में हालात यह है कि कालामढ फर्जी पट्टाकाण्ड के सभी दस्तावेज आज भी यह सिद्ध करते प्रतीत होते है कि उस समय के तत्कालीन अधिकारी एवं कर्मचारीगण तत्कालीन समय में भूमाफियाओं से मिलीभगत कर शासकीय भूमि को अपने अधिकारों का गलत उपयोग कर अवैद्यानिक रूप से पट्टा व कब्जा करने के दोषी है। जिनके खिलाफ आज भी तत्कालीन समय की एफआईआर पुलिस प्रशासन के पास विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज है और आरोपीगण अभी भी पूरी तरह स्वतंत्र होकर प्रशासन की कार्यवाही को धता बताते घूम रहे है।
कई धाराओं के दोषी है प्रशासनिक अधिकारी/कर्मचारी
शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग अंतर्गत बैराड क्षेत्र का कालामढ वनग्राम पट्टाकाण्ड पूरी तरह से भूमाफियाओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का काला चिट्टा उजागर करता है जिसमें आज भी शासकीय चरनोई भूमि पर अवैद्यानिक रूप से भूमाफियाओं का कब्जा बना हुआ है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार भूमाफियाओं द्वारा शासकीय एवं चरनोई भूमि के फर्जी पट्टे करके इन पट्टों को अवैध विक्रय कर लाखों रूपये का आर्थिक लाभ अर्जित किया गया है। पुलिस थाना ब्यूरो इकाई ग्वालियर में पदस्थ तत्कालीन निरीक्षक आरएन दुबे एवं निरीक्षक डीएस सेंगर द्वारा मामले का सत्यापन भी किया गया। पुलिस के अनुसार कई अपात्रों एवं भूमाफियाओं को चरनोई भूमि की प्रकृति परिवर्तित कर आर्थिक स्वलाभ हेतु आबादी भूमि घोषित कर पट्टे आवंटित किये। जिसमें भूमाफियाओं द्वारा लाखों का लाभ अर्जित किया। साथ ही शासन को राजस्व की हानि पहुंचाकर आर्थिक अपराध घटित किया। जिसका प्रतिवेदन तत्कालीन जिला कलेक्टर को भेजा गया। जिला प्रशासन ने कालामढ की शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 570/1, रकवा 7.85 हेक्टेयर, सर्वे क्रमांक 572/2 रकवा 1.40 हेक्टेयर सर्वे क्रमांक 571/1 रकवा 5.07 हेक्टेयर, 571/2 रकवा 4.21 हेक्टेयर आदि नम्बरों का लेखित किया गया है। कालामढ पट्टाकण्ड में कई भूमाफियाओं को दोषी पाये जाने के साथ-साथ राजस्व के कई अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी दोषी पाया गया। जिसमें नामजद कई भूमाफियाओं के अलावा तत्कालीन सरपंच ग्राम कालामढ बैराड, उपखंड अधिकारी राजस्व एनके वीरबाल, तत्कालीन तहसीलदार आरबी शिन्दोश्क, तत्कालीन तहसीलदार शैलेन्द्र राय, तत्कालीन तहसीलदार हाकिमसिंह समन, तत्कालीन तहसीलदार जयकरण सिंह गुर्जर, तत्कालीन तहसीलदार साहिर खांन, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक रामकिशोर त्रिवेदी, तत्कालीन आरआई राजेश वत्स, तत्कालीन आरआई जेपी श्रीवास्तव, तत्कालीन पटवारी प्रेमनारायण श्रीवास्तव, तत्कालीन पटवारी बृजलाल शर्मा एवं तत्कालीन पटवारी घनश्याम वर्मा आदि शामिल थे। जिनके खिलाफ पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज करते हुये धारा 420, 409, 120 बी, 467, 471 भादवि एवं 13 (1) डी, 13 (2) भ्र.नि.अ.1988 के अंतर्गत वारंट जारी किये गये। लेकिन उक्त प्रकरण के सभी आरोपी सांठगांठ के चलते आज भी खुली हवा में पुलिस गिरफ्त से दूर चैन की सांस ले रहे है।
इनका कहना है
शिवपुरी जिले के राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्नमूलन समिति के सचिव धर्मेन्द्र शर्मा ने इस मामले में चर्चा करते हुये बताया कि पोहरी अनुविभाग के बैराड क्षेत्र अंतर्गत कालामढ वनग्राम शासकीय चरनोई पर कुछ वर्ष पूर्व शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारीगणों की भूमाफियाओं से सांठगांठ के चलते अवैध पट्टे एवं कब्जे करा दिये गये। जो आज भी पूरी तरह से भूमाफियाओं के कब्जे में है एवं तत्कालीन समय में दोषी पाये गये अधिकारी एवं कर्मचारी के अलावा भूमाफिया लोगों पर पुलिस द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध है। परंतु अपने प्रभाव व सांठगांठ के चलते आरोपी आज भी स्वतंत्र रूप से पुलिस गिरफ्त से बाहर होकर घूम रहे है। उन्हें गिरफ्तार किया जाना एवं शासकीय भूमि को मुक्त किया जाना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीे हुआ तो हमारी समिति आन्दोलन के लिये मजबूर होगी।
धर्मेन्द्र शर्मा सचिव राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्नमूलन समिति शिवपुरी
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