शिवपुरी। जिले में अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। खनियाधाना के कफ़ार और पिछोर क्षेत्र के दविया कला के बाद अब चमरौआ गांव में भी महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं गांव में शराब बेचे जाने की सूचना मिलने पर एक दुकान पर पहुंचीं और वहां रखी शराब की बोतलों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सूचना मिलते ही दुकान पर पहुंचीं महिलाएं
मंगलवार को गांव में अवैध शराब बेचे जाने की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर संबंधित दुकान पर पहुंचीं। महिलाओं ने दुकान के अंदर रखी शराब की बोतलें बाहर निकालीं और सड़क पर फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद लोगों ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बोलीं- शराब से परिवार हो रहे बर्बाद
महिलाओं का कहना है कि गांव में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। शराब की वजह से कई पुरुष नशे के आदी हो चुके हैं। इसके चलते परिवारों में आए दिन विवाद, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। महिलाओं ने बताया कि कई परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि गांव को नशामुक्त बनाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर उन्होंने खुद आगे आकर अवैध शराब के खिलाफ अभियान शुरू किया है।
समाज की बैठक में लिया गया था बड़ा फैसला
आदिवासी सहरिया समाज की 12 जुलाई को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई शराब पीते हुए पाया गया तो उस पर ₹5100 का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। बैठक में कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने तथा प्रशासन से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कराने का भी निर्णय लिया गया था।
कफ़ार से शुरू हुआ अभियान, दविया कला के बाद अब चमरौआ
अवैध शराब के खिलाफ इस अभियान की शुरुआत 16 जुलाई को खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफ़ार गांव से हुई थी। वहां महिलाओं ने अवैध शराब के ठिकानों पर पहुंचकर शराब और महुआ नष्ट कर दिया था। इसके बाद पिछोर क्षेत्र के दविया कला गांव में भी महिलाओं ने कच्ची और अवैध देशी शराब सड़क पर फेंककर विरोध दर्ज कराया। अब चमरौआ गांव में हुई कार्रवाई इस अभियान की लगातार तीसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
गांवों को नशामुक्त बनाने का संकल्प
आदिवासी महिलाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य गांवों को नशामुक्त बनाना और परिवारों को शराब की बुराइयों से बचाना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक गांवों में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं होगा, तब तक उनका अभियान इसी तरह जारी रहेगा। वहीं, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।







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