शिवपुरी। जिले के कोलारस एसडीएम कार्यालय परिसर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब रन्नौद तहसील में पदस्थ पटवारी प्रदीप गुप्ता ने कथित रूप से जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल कोलारस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।
अस्पताल में उपचार के दौरान पटवारी प्रदीप गुप्ता ने आरोप लगाया कि एक नामांतरण प्रकरण में उनसे गलती हुई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था। उन्होंने परिवार सहित एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी भूल के लिए क्षमा भी मांगी थी। इसके बावजूद पिछले 8 से 9 महीनों से उनका वेतन रोक दिया गया, जिससे परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनका कहना है कि मंगलवार को अन्य पटवारियों का वेतन जारी कर दिया गया, लेकिन उनकी सैलरी नहीं आई। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
पटवारी का कहना है कि जिस नामांतरण प्रकरण में उनसे त्रुटि हुई थी, उसकी जांच का वह सामना कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई लंबित रहने और वेतन बंद रहने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
वहीं, कोलारस एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित पटवारी ने जमीनों के नामांतरण नियमों के विपरीत किए हैं। मामले की जांच जारी है और विभागीय कार्रवाई होना तय है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पटवारी जांच और संभावित कार्रवाई से बचने के लिए इस तरह का कदम उठा रहा है।
एसडीएम ने वेतन रोकने के आरोपों पर भी सफाई देते हुए कहा कि पटवारी का वेतन एसडीएम कार्यालय से नहीं, बल्कि तहसील कार्यालय से जारी होता है। उनके अनुसार संबंधित पटवारी कई महीनों से तहसील कार्यालय नहीं पहुंचा है, संभवतः इसी कारण उनका वेतन जारी नहीं हो सका।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटे हैं। अस्पताल में भर्ती पटवारी का इलाज जारी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बाइट प्रदीप गुप्ता पटवारी







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