शिवपुरी: धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी ओरछा धाम में कवि सुमित ओरछा द्वारा आयोजित युवनाद सम्मान समारोह में गौ सेवा का संदेश पूरे जोश के साथ गूंजा। इस भव्य आयोजन में गौ सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कल्लू तिवारी (कल्लू महाराज) को 1008 श्री महंत रवि शंकर जी महाराज, रावतपुरा सरकार के करकमलों से सम्मानित किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद कल्लू महाराज भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत नहीं बल्कि “गौ माता का सम्मान” है। मंच से उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा, “हमने दिल दिया है, जान भी देंगे—गौ माता तेरे लिए। तुम्हारे ऊपर कोई अत्याचार नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए हमें बलिदान ही क्यों न देना पड़े। हम जिएंगे भी तुम्हारे लिए और मरेंगे भी तुम्हारे लिए।”
उनके इस संकल्प ने पूरे कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं और समाजसेवियों में उत्साह भर दिया। उन्होंने आगे कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति और धर्म की आधारशिला है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। ऐसे में गौ रक्षा केवल आस्था नहीं बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है।
कल्लू महाराज ने देशभर के संत समाज से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी संत एक आवाज में गौ माता को “राष्ट्रीय पशु” घोषित कराने की मांग करें। उन्होंने इसे भारत की संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान से जुड़ा विषय बताया।
कार्यक्रम में 1008 श्री महंत रवि शंकर जी महाराज, रावतपुरा सरकार का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कल्लू महाराज ने कहा कि गुरुजनों के आशीर्वाद से ही उन्हें गौ सेवा और समाज सेवा का मार्ग मिला है और यह सम्मान उनके लिए आगे और अधिक सेवा करने की प्रेरणा बनेगा।
इस अवसर पर दिनारा क्षेत्र के कई प्रमुख समाजसेवी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इनमें जिला पंचायत सदस्य पूर्व सतीश फौजी, सत्यम गुप्ता, एसके गुरु, श्रीमती जया गुप्ता सहित अन्य गणमान्य नागरिकों का भी सम्मान किया गया। सभी ने गौ सेवा और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।ओरछा धाम, जो श्रीराम की नगरी और आस्था का प्रमुख केंद्र है, वहां इस प्रकार के आयोजन ने क्षेत्रवासियों में गर्व और खुशी का माहौल बना दिया। दिनारा सहित आसपास के क्षेत्रों में इस आयोजन की व्यापक चर्चा रही।
अंत में कल्लू महाराज ने कहा, “यही हमारा संकल्प है, यही हमारा भारत है, यही हमारी संस्कृति और धर्म है।” उनका यह संदेश न केवल कार्यक्रम की आत्मा बना, बल्कि आने वाले समय में गौ संरक्षण के प्रति समाज को नई दिशा देने वाला भी साबित हो सकता है।







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