कलेक्टर से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक की शिकायत, फिर भी 30 साल में नहीं मिला मुआवजा

रेल पटरी निर्माण में अधिग्रहीत की गई भूमि का पाँच किसान मुआवजे के लिए दर-दर भटकते, अब रेल मंत्री से न्याय की आस
शिवपुरी। वर्ष 1988-89 में रेलवे द्वारा इटावा-गुना बड़ी रेल लाइन निर्माण के समय बदरवास स्टेशन से बदरवास ए बी रोड़ तक पहुँच मार्ग (एप्रोच रोड) निर्माण हेतु 5 किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई। अधिग्रहण के 30 वर्ष बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया।
हितग्राहियों द्वारा अनेक बार कलेक्टर ऑफिस से लेकर सीएम हेल्पलाइन पर भी लगतार शिकायतें की गईं लेकिन कुछ हल नहीं हुआ बल्कि अब तो भू-अर्जन विभाग के अधिकारी झूठ बोलकर किसानों को ऑफिस से बाहर निकल देते हैं। कभी कहते हैं रिकॉर्ड नहीं है कभी कहते हैं मुआवजा मिल गया कभी कहते हैं समय नहीं है कभी कहते हैं दुसरे ऑफिस में जाओ आदि आदि। अब किसानों ने प्रधानमंत्री और रेलमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है और पूछा है कि यदि हमें अपना हक पाने के लिए आत्महत्या करना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार हैं ऐसा करने से काम से कम हमारे बाल बच्चों को तो उसका लाभ मिल सकेगा और वो भूखों नहीं मरेंगे।

क्या कहते हैं पीडि़त

मैं पिताजी के समय मुआवजा लेने के लिए ऑफिसों में लगातार चक्कर काट रहा हूं। कोई भी अधिकारी 30 वर्ष हो गए आज तक हमारी सुनने को तैयार नहीं है। कहते हैं कि हमारे पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। कई बार कलेक्टर साहब के पास गए, लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। हम आदरणीय प्रधानमंत्री जी और रेल मंत्री जी से प्रार्थना का करते हैं हमें शीघ्र मुआवजा दिलाएं।


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