
यूनिफार्म तैयार करने के लिए समूह के लिए आया था बजट, अफसरों ने बिना बताए खुद खरीद लिया यूनिफार्म का कपड़ा
जिले में सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के 2.40 लाख बच्चों को 15 सितंबर तक बंटना थीं ड्रेस, अब बनना शुरू हुईं
शिवपुरी। आज हम देखते हैं कि प्रतिदिन कोई न कोई भ्रष्टाचार का नया मामला हमारे सामने आता है और शायद इन भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसना आज एक बड़ी चुनौती है। आज हमारे देश को बॉर्डर के दुश्मनों से अधिक भ्रष्टाचारियों से खतरा अधिक बना हुआ है। इसी तरह का मामला शिवपुरी जिले में सामने आया है और यह घोटाला राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने अपने निज हित को साधने के लिए कर डाला। अधिकारियों ने 2 लाख 40 हजार बच्चों की ड्रेसों के आई 14 करोड़ 40 लाख की राशि स्वीकृत हुई जिसमें प्रत्येक बच्चे को 600 रुपए में दो ड्रेसें देनी थी। इस बजट में से अधिकारियों द्वारा करीब 7 करोड़ रुपए अपनी जेबों में डाल लिए हैं। इन ड्रेसों को बच्चों के लिए 15 सितम्बर तक बंटाना था, लेकिन अधिकारी अपनी जेब भराई की तानाबानी करने में ही लगे रहे अब डे्रस बनना शुरू हुआ है।
जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा इस साल सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को यूनिफार्म सिलकर देने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित महिलाओं के स्व सहायता समूहों को दी है। स्व सहायता समूहों के खातों में राशि जारी करने राज्य शिक्षा केन्द्र 80 फीसदी बजट एनआरएलएम को पहले ही जारी कर चुका है। ताकि समूहों द्वारा स्वयं कपड़ा खरीदा जाए और ड्रेस सिलकर स्कूलों में वितरित की जाएं, लेकिन आजीविका मिशन के अधिकारियों ने स्वयं कपड़ा खरीद लिया है। जबकि स्व सहायता समूहों की महिलाओं को इस बात की खबर तक नहीं है। बता दें कि जिले के सभी सरकारी व मिडिल स्कूलों में 2 लाख 40 हजार छात्र-छात्राओं को 15 सितंबर तक स्कूल ड्रेस सिलकर वितरित करना थीं। लेकिन ड्रेस सिलाई का काम पिछले सप्ताह से ही शुरू कराया गया है। एनआरएलएम के अधिकारियों का कहना है कि 30 अक्टूबर तक स्कूलों में बच्चों को यूनिफार्म उपलब्ध कराना है।
इस तरह से जानें अधिकारियों के भ्रष्टाचार का गणित
शिवपुरी जिले में छात्र संख्या के मान से 14 करोड़ 40 लाख का बजट जारी किया गया है। जिसमें प्रति छात्र 600 रुपए जारी किए गए हैं। लेकिन जो कपड़ा खरीदा है, उसमें शर्ट के कपड़े की कीमत 40 रुपए प्रति मीटर और पेंट की 89 से 90 रुपए प्रति मीटर बताई जा रही है। जबकि एक ड्रेस सिलने पर समूह की महिला को 25 रुपए दे रहे हैं। यानी एक ड्रेस 160 रुपए और दो ड्रेस 320 रुपए में पड़ रही है। जबकि दो ड्रेस सिलकर 600 रुपए सरकार दे रही है। प्रति छात्र के मान से 280 रुपए तक की बचत जोड़ें तो 2 लाख 40 हजार बच्चों की संख्या को देखते हुए 6 करोड़ 72 लाख रुपए होते हैं।
क्या कहती हैं समूह की महिलाएं

- हमें स्कूल की ड्रेस के बारे में कोई जानकारी नहीं है, हमें किसी ने कुछ नहीं बताया।
लीला, अध्यक्ष
भैरोबाबा स्वसहायता समूह

- स्कूल के ड्रेस की हमें कोई जानकारी नहीं दी गई न ही हमारे खाते में कोई पैसा आया है। हमारे पास कभी कोई सिलाई नहीं दी गई।
सुशीला, अध्यक्ष
काली माता स्वसहायता समूह
इनका कहना है
- आजीविका मिशन के समूह हैं और उनकी संस्थाएं हैं। उनके

माध्यम से स्कूल के बच्चों के ड्रेसों की सिलाई हो रही है। हमने 176 समूहों को नोडल बनाया है।
9 अगस्त को हमें सूची मिली कि किस स्कूल में कितने बच्चों के लिए ड्रेसेस बनना है। इसके बाद हमने मैपिंग कर 176 समूहों को नोडल बनाया। इन समूहों के खाते में 70 प्रतिशत राशि जारी करनी तो हमने 176 समूहों के खाते में राशि जारी की है। जिनमें से कुछ समूहों की आरटीजीएस फेल होने के कारण कुछ समूहों को राशि नहीं मिली। महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है जिसके लिए 18 सेंटर बनाए गए हैं। इसके बाद ट्रेनिंग लेकर महिलाएं ड्रेसेस सिल रही हैं। इसमें एक रुपए भी कैश पैमेंट नहीं होना है इसमें आरटीजीएस या चैक के माध्यम से ही पैमेंट होगा।
अरविंद मार्ग, जिला परियोजना प्रबंधक
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शिवपुरी
- ड्रेसेस के संबंध में मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत

शिवपुरी के निर्देश पर संपूर्ण जिले में प्रत्येक स्वसहायता समूह की जांच करवाई जा रही है। प्रथम दृष्टया दो बातें सामने आई हैं एक तो कि समूहों को इसकी कोई जानकारी नहीं है। दूसरी बात इनके द्वारा जो कपड़ा खरीदा गया है वह बहुत ही घटिया है। नियमानुसार समूह के खाते में ही पूरा पैसा जाना है और समूह को ही पूरी जिम्मेदारी दी गई है वह किसी व्यवसायी के जाकर कपड़ा खरीदें और सिलवाकर स्कूल में बंटवाएं। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
शिरोमणी दुबे, डीपीसी
जिला शिक्षा केन्द्र शिवपुरी






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