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राम रहीम कांडः लावारिस पड़ी 17 लाशें की जेब में रात भर बजते रहे मोबाइल

panchkula morgue 26 08 2017पंचकुला। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम
को दोषी करार दिए जाने के बाद पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली सहित आस-पास के
इलाकों में शुक्रवार को हिंसा फैल गई। पंचकुला में जहां राम रहीम को कोर्ट
ने दोषी ठहराया था, वहां सबसे ज्यादा जान-माल का नुकसान हुआ है। सूत्रों ने
बताया कि हिंसा के कारण मारे गए लोगों की जेब में रखे मोबाइल फोन रातभर
बजते रहे।
उनके शव पंचकुला सिविल अस्पपाल में रखे गए हैं और अभी तक
उनकी पहचान नहीं हो पाई है। शुक्रवार को भड़की हिंसा में मारे गए 28 लोगों
में से 27 ने पंचकुला की सड़कों में हुए संघर्ष में अपनी जान गंवाई है।
इनमें से 17 लोगों के शव पंचकुला सिविल अस्पताल में रखे हैं और अभी तक किसी
भी शव की पहचान नहीं हो सकी है।
इस संघर्ष में 50 से अधिक
पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिसमें से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल
हैं। घटना में गंभीर रूप से घायल करीब 55 लोगों को चंडीगढ़ भेज दिया गया
है। अस्पताल के एक सूत्र ने बताया, मरने वालों में दो महिलाएं भी हैं।
मृतकों में सबसे कम उम्र का एक लड़का है, जिसकी उम्र 15 से 17 साल के बीच
बताई जा रही है।
वहीं, सबसे अधिक उम्र 60 साल के करीब है। सूत्रों ने
बताया कि डॉक्टरों से कहा गया था कि वे मृतकों की जेब में रखे मोबाइल पर
आने वाली कॉल का जवाब नहीं दें। बताया जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया,
ताकि कर्फ्यू के बावजूद रात में लोग अस्पताल में नहीं पहुंचने लगें।
डॉक्टर
ने कहा कि हम सुबह में मोबाइल पर आने वाली कॉल्स का जवाब देंगे। एक डॉक्टर
ने अपना नाम जाहिर नहीं करने के अनुरोध पर बताया कि अस्पताल में रखे सभी
17 शवों के शरीर पर गोलियां लगने के निशना हैं। मृतकों के गले, छाती और पीठ
पर गोलियां लगी हैं। इसके अलावा कुछ शवों पर पत्थर से घायल होने की चोटें
भी साफ दिख रही हैं।
किसी भी मृतके के पास से कोई भी पहचानपत्र नहीं
मिला है और अधिकांश कुर्ता-पायजामा पहने हुए ग्रामीण लग रहे हैं। शाम को
4.30 बजे से एंबुलेंस से पंचकुला के सेक्टर 6 में घायलों को लाने लगी थी।
जब पुलिस घायलों के परिजनों की भीड़ को नियंत्रित करने में असफल हो गई, तो
पुलिस ने उन्हें बाहर कर दिया और हॉस्पिटल के गेट पर बैरीकेटिंग लगवा दिया।
इमरजेंसी
वार्ड में नजारा दिल दहलाने वाला था, वहां करीब 100 गंभीर हालत में घायल
लोग स्ट्रेचर पर पड़े थे। इनमें से अधिकांश की मौत हो चुकी थी। किसी को भी
नहीं पता था कि वे कौन हैं और उनके परिवार के सदस्य कहां हैं। पूरे
इमरजेंसी वार्ड की फर्श पर खून ही खून नजर आ रहा था। सभी डॉक्टरों की
छुट्टियां आने वाले कुछ दिनों के लिए कैंसल कर दी गई हैं।
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