




योगेन्द्र जैन, पोहरी।
शिवपुरी जिले से 35 किमी दूर पोहरी के प्राचीन दुर्ग में स्थित अतिप्राचीन
दिगम्बर जैन मंदिर जो अपने आप ही मंदिर के अतिशय को प्रकट करता है। श्री
1008 आदिनाथ दिगम्बर अतिशयकारी जैन मंदिर करीब 1600 वर्ष प्राचीन माना जाता
है। मंदिर जी में वर्तमान में 3 वेदियां है जिनमें से 2 अति प्राचीन व 1
नवीन वेदी है। तीनो वेदी में से मूल वेदी में मूलनायक 1008 श्री आदिनाथ
भगवान की प्राचीन व अतिशयकारी प्रतिमा बिराजमान है प्राचीन प्रतिमा के साथ
इस मंदिर में कई अतिशय हुए है जो जैन समाज की आस्था का केंद्र है। किले में
स्थित होने के बाद भी भक्त पैदल जैन मंदिर जी में पूजा अर्चना करने जाते
है मंदिर जी में लगातार सर्प द्वारा आना पूजा व अभिषेक देखकर बिना किसी को
कोई हानि पहुंचाना चले जाना लोगों की आस्था में वृद्धि करता है। मंदिर जी
मे दोपहर के समय लोगों द्वारा संगीत से पूजा होता सुना है जबकि दोपहर के
समय मंदिर जी बंद रहता है समाज के बुर्जगों की मानें तो प्राचीन व
अतिशयकारी भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के देव आज भी मंदिर जी में पूजा अर्चना
करने आते है जबकि मूल वेदी पर प्राचीन अन्य प्रतिमा भी है 2001 में मूल
वेदी की प्रतिमा पदमप्रभु पर स्वयं ही जल धारा होने लगी। इस अतिशय अभिषेक
को देखने पोहरी के वासी व जैन समाज के लोगों ने भी अतिशय देखा इस अतिशय की
जानकारी आस पास के जैन भक्तों को लगी तो भक्तो का तांता भी मंदिर जी मे
लगाने लगा। मंदिर जी के पास महावीर प्रसाद जैन द्वारा इस कि जानकारी
शिवपुरी, मुरार, श्योपुर, बैराड़, आसपास के क्षेत्रों में दी तो समाज के
लोगो को पता चला तो लगातार 3 दिनों तक भक्तो का तांता मंदिर जी मे लगा रहा
जबकि दूसरे दिन भगवान का दर्शन करने आये बाहर के भक्तों को मंदिर जी में
प्रतिमा पर अभिषेक होते दिखाई दिया जबकि दूसरे दिन स्थानीय समाज को अभिषेक
नही देखा। इस प्रकार से मंदिर जी मे अतिशय होते रहते है बहुत साल पुरानी
बात है मंदिर जी की वेदी पर पुजारी पूजा कर रहा था तो निचली वेदी से आवाज
आई कि इस वेदी की भी पूजा किया करो। वेदी की पूजा शुरू होने के बाद आवाज
आना बंद हो गयी मंदिर जी के अतिशय के बारे में समाज के बद्री प्रसाद अपने
पोते को मंदिर जी दर्शन करने ले गए वो मंदिर जी में दर्शन कर रहे थे पोता
मंदिर जी के चौक में खेल रहा था जबकि बद्री प्रसाद जी ने पूछा कि किसके साथ
खेल रहा है तो बोले इनके साथ जबकि वहां कोई नही था मंदिर जी में सुबह
प्रति दिन पहले दर्शन करने जाती श्रीमति धनकुंवर जैन को मंदिर जी में
प्रतिदिन 5 रुपए मिलते और वो उन पैसे को मंदिर जी की पेटी में डाल देती। इस
प्रकार यहाँ चलता रहा एक दिन मंदिर जी मे पैसे के बारे में बताया तो उन
दिन से पैसे मिलना बंद हो गए आज भी रात के समय देवो द्वारा मंदिर जी में
आरती की आवाज लोगो ने सुनी है मंदिर जी के दूसरी वेदी में मूलनायक चंदप्रभु
की प्रतिमा विराजमान है जो पोहरीं से 6 किमी दूर पिपरघार में किसी के खेत
में खुदाई के दौरन मिली थीं उसने सूचना पोहरी जैन समाज को दी। चंदप्रभु
भगवान की भी अति प्राचीन प्रतिमा है मंदिर में तीसरी वेदी का निर्माण अभी
करवाया गया जिसमें मूलनायक अजीतनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान है मंदिर में
लगातार देवो द्वारा पूजा व आरती करने व अतिशयकारी प्रतिमा के दर्शन करने
जैन समाज के भक्तों के अलावा राजस्थान, उत्तरप्रदेश, देहली से भक्तगण भी
दर्शनों के लिए आते हैं।
आज भी देवों द्वारा की जाती है पूजा अर्चना
पोहरी
तहसील के दुर्ग में नदी के किनारे बसा श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर मंदिर जी
अपने अतिशयकारी के रूप जाना जाता है। मंदिर जी में आज भी देवो द्वारा पूजा
अर्चना होने की बात सामने आ रही है जबकि रात में संगीत में आरती की आवाज
मंदिर से आती है मंदिर जी के पास महावीर प्रसाद जैन शिक्षक के पिता व
माताजी द्वारा भी मंदिर जी में दोपहर के समय पूजा होने की आवाज सुनी है
जबकि मंदिर जी को 11 बजे उनके द्वारा ही बंद किया जाता था।
प्राचीन वेदी पर चतुर्थ कालीन प्रतिमा विराजमान
पोहरी
में श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन प्राचीन मंदिर होने के साथ ही प्राचीन
वेदी पर अति प्राचीन चतुर्थ कालीन प्रतिमा जी विराजमान है वेदी पर प्राचीन
17 सिद्ध यंत्र विराजमान है। प्राचीन मंदिर जी मे ही चतुर्थ कालीन प्रतिमा
जी के दर्शन मिलते है।
सर्प आज भी मंदिर में दर्शन करने आता है
पोहरी
में अतिशयकारी भगवान आदिनाथ की अतिशय कारी प्रतिमा के दर्शन मनुष्य के साथ
सर्प भी अभिषेक देखने व पूजन सुनने आते है मंदिर जी का इतिहास 1600 वर्ष
प्राचीन होने के कारण मंदिर जी में अतिशय होने के प्रमाण सामने आते रहे है।
मंदिर जी मे 1976 में तीन पुजारी स्व. राजाराम, स्व. रामप्रसाद, महावीर
प्रसाद जैन द्वारा सुबह पूजन के समय राज्य मंदिर के दरवाजे के बीचों बीच फन
धरि काला नाग बैठ रहा महावीर प्रसाद को डोटी पर जाना था प्रार्थना कर
रास्ता मांग उसके बाद नाग ने रास्ता दिया और निकलने के बाद फिर दरवाजे ने
बैठ गया पूजन के बाद चल गया।
जैन समाज की आस्था का केंद्र है अतिशयकारी मंदिर
प्राचीन
मंदिर होने के कारण किले में स्थित मंदिर के दर्शन करने बाहर वासी से जैन
भक्त जाते है जबकि 1 कि. मी दूर होने के बाद भी भक्त सुबह पूजा अर्चना करने
जाते है इस मंदिर जी मे अतिशय होने व बड़े बाबा सच्चे मन से मुराद मांगने पर होती है मनोकामना पूर्ण
पोहरी
में बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के मंदिर जी के दर्शन करने से पापों का नाश हो
जाता है बड़े बाबा अतिशयकारी होने के साथ मनोकामना के धारी है मंदिर जी मे
बड़े बाबा के सामने सच्चे मन से मनोकामना जो भी भक्त मांगता है वो पूर्ण
होती है मंदिर में वर्षो से पूजा कर रहे कैलाश नारायण जैन शिक्षक ने बताया
कि लगभग 30 सालो से मंदिर जी की पूजा कर रहे है उनकी सभी मनोकामना बड़े
बाबा आदिनाथ ने पूर्ण की है कैलाश नारायण जी बाहर बासी से सुबह 5 बजे मंदिर
जी मे पुहंच कर पूजा की तैयारी करते है बड़े बाबा में अटूट आस्था है अरुण
जैन ने भी बड़े बाबा के अतिशय व मनोकामना के बारेके बताया कि बड़े बाबा के
सच्चे मन से मन्नत मांगने से पूर्ण हो जाती है ऐसा उन्हंने खुद अनभव किया
है।
विमान जी में खाना बनाने वाले हलवाई को भी दिए देवो ने दर्शन
श्री
1008 आदिनाथ मंदिर जी के अतिशय के बारे में समाज के अलावा मंदिर जी विमान
महोत्सव में खाना बना रहे भोला गुप्ता निवासी शिवपुरी जब दोपहर के समय
मंदिर जी अकेले खाना बना रहे थे तब मंदिर जी के अंदर कोई सफेद वस्त्र में
देखा जब अशोक कुमार जैन शिक्षक मंदिर जी मे पुहंचे तो हलवाई ने बताया कि
मंदिर जी के अंदर कोई पूजा कर रहा है अशोक जैन द्वारा देखा गया अंदर कोई
नही था, मंदिर जी में रातकालीन आरती में ढोलक बज रहे कोलम सेन जोर जोर से
रोने लगे तो समाज के लोगों ने पूछा कि क्या हो गया तो मंदिर के प्रतिमा जी
के दर्शन करने के बाद जोर जोर से चिलाने लगा कि चमत्कार है चमत्कार है।






Be First to Comment